
Voter Preferences: निकाय और पंचायत चुनाव से की आहट के साथ ही सोशल मीडिया पर राज्य निर्वाचनआयुक्त के एक सवाल ने मतदाताओं की सोच को खुलकर सामने ला दिया। आयुक्त राजेश्वर सिंह ने पूछा कि आगामी नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में मतदान करते समय आप प्रत्याशी के व्यक्तित्व, चरित्र और कृतित्व की किन-किन विशेषताओं को ध्यान में रख कर मतदान करना चाहेंगे? जवाब में लोगों ने साफ कहा कि अब जाति, धर्म और धनबल से ऊपर उठकर ईमानदार, जवाबदेह और जनता के बीच रहने वाले उम्मीदवार चाहिए।
राजनीति में स्वच्छता और सुचिता को लेकर राजस्थान पत्रिका जनप्रहरी नाम से अभियान चला रहा है। वर्ष 2018 में इस अभियान को शुरू किया गया। वर्ष 2020 में जनप्रहरी अभियान से जुड़े 101 लोग पार्षद का चुनाव जीते। वहीं, तीन जिला प्रमुख बने और 159 सरपंच, 11 प्रधान और 38 जिला परिषद का चुनाव जीते।
"पोस्ट का उद्देश्य बौद्धिक और चिंतन करने वाले लोगों के सुझाव सामने लाना है। जन समस्याओं को समझने वाले लोगों का चयन जरूरी है। इससे वार्ड-पंचायत का विकास तेजी से होगा और समस्या का समाधान बेहतर तरीके से हो सकेगा।"
-राजेश्वर सिंह, आयुक्त, राज्य निर्वाचन
"राजनीति में शुचिता कम होती जा रही है। चुनाव जाति और पैसों पर आधारित हो गए हैं। ऐसे माहौल में सही व्यक्ति का चयन करना मतदाता के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।"
-सीआर गुर्जर
"उम्मीदवार ऐसा हो जो जन के बीच आसानी से उपलब्ध रहे। छवि भ्रष्टाचार मुक्त हो, आपराधिक रिकॉर्ड न हो और चुनाव से पहले किए सामाजिक कार्य व्यक्तित्व की पहचान हों।"
-हरवेंद्र शर्मा
"जनप्रतिनिधि का चयन जाति, धर्म, धनबल या रिश्तेदारी के आधार पर नहीं, बल्कि उसके चरित्र, ईमानदारी, जनसेवा, पारदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण को देखकर होना चाहिए। पार्षद भले ही कम शिक्षित हो, लेकिन निष्पक्ष, न्यायप्रिय हो और विश्वसनीयता साबित कर चुका हो।"
-कमल सिंह भाटी
नगर निगम और पंचायतें लोकतंत्र की बुनियाद हैं। यहां जनप्रतिनिधि सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी तय करता है। उम्मीदवार का चयन जाति, धनबल या राजनीतिक प्रभाव से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, ईमानदारी और काम के आधार पर होना चाहिए। सोशल मीडिया पर मतदाताओं ने जिस तरह जवाबदेह और पारदर्शी प्रतिनिधि की मांग रखी है, उसे मतदान के दिन भी निभाना होगा। अच्छी राजनीति की शुरुआत अच्छे उम्मीदवार और जागरूक मतदाता से ही होती है। वोट की कसौटी चरित्र और जनसेवा बने, तो स्थानीय निकाय मजबूत होंगे और लोकतंत्र भी।