
राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव की सरगर्मी चरम पर है। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में करीब 1.44 करोड़ मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। नामांकन 27 अगस्त से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगा। राज्य निर्वाचन आयोग नौ और ग्यारह सितंबर को दो चरणों में निकाय चुनाव करवाएगा। चुनाव परिणाम 14 सितंबर को जारी होगा। ऐसे में संभावित प्रत्याशी सिर्फ पारंपरिक तरीके नहीं अपना रहे। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी उनका बड़ा चुनावी सलाहकार बन गया है। कई दावेदार AI टूल्स से वोटर मूड, सोशल मीडिया ट्रेंड और जीत की संभावनाएं जान रहे हैं।
जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर समेत प्रदेशभर के शहरों में प्रत्याशी AI प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। चैटजीपीटी, अन्य चैटबॉट्स और प्रोफेशनल AI एजेंसियों से वोटर लिस्ट का विश्लेषण, वार्डवार कमजोरियां और विरोधियों की रणनीति पूछी जा रही है। भाषण, रील्स, सेंटिमेंट एनालिसिस सब AI से तैयार करा रहे हैं।
कुछ उम्मीदवार AI को अपनी पुरानी चुनावी रिपोर्ट दिखाकर भविष्यवाणी करवा रहे हैं कि किस वार्ड में कितने वोट मिल सकते हैं। युवा प्रत्याशी तो सोशल मीडिया पोस्ट्स तक AI से तैयार करवा रहे हैं ताकि संदेश सटीक और आकर्षक बने।
पहले सिर्फ कुंडली और ग्रह-नक्षत्रों पर भरोसा होता था। अब कई प्रत्याशी दोनों का मेल कर रहे हैं। ज्योतिषी से शुभ मुहूर्त पूछने के बाद AI से यह भी चेक करवा रहे हैं कि उसी दिन नामांकन जमा करने से सोशल मीडिया पर क्या रिएक्शन मिल सकता है। पंडितों के पास कुंडली लेकर जाने वाले अब लैपटॉप और मोबाइल में AI ऐप्स भी लेकर पहुंच रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड छोटे नगरपालिकाओं से लेकर बड़े नगर निगमों तक फैल रहा है। लोग मानते हैं कि ग्रह-नक्षत्र भाग्य बताते हैं, लेकिन AI ठोस आंकड़े देता है।
27 अगस्त से नामांकन प्रक्रिया शुरू होने वाली है। प्रत्याशी AI से पूछ रहे हैं कि किस दिन और किस समय नामांकन पत्र जमा करना ज्यादा प्रभावी रहेगा। कुछ AI टूल्स से अभियान का बजट प्लान, पोस्टर डिजाइन और यहां तक कि भाषण के ड्राफ्ट भी तैयार करवा रहे हैं। आरक्षण सूची जारी होने के बाद टिकट की होड़ में AI रिपोर्ट्स को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। कई राजनीतिक दल भी अपने उम्मीदवारों को AI ट्रेनिंग देने की बात कर रहे हैं ताकि डेटा-बेस्ड अभियान चल सके।
दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को मतदान होगा तथा 14 सितंबर को नतीजे आएंगे। इस बड़े चुनावी संग्राम में AI अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि जीत का नया सूत्रधार बन चुका है। प्रत्याशी मानते हैं कि सही डेटा और स्मार्ट रणनीति उनके प्रयासों को नई दिशा दे सकती है। राजस्थान के निकाय चुनाव में अब पारंपरिक राजनीति के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह नया अध्याय लिखा जा रहा है।