cyber crime prevention: पुलिस एडवाइजरी जारी: अनजान लिंक पर निवेश न करें, 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं
जयपुर। वर्तमान समय में साइबर अपराधों में तेजी से वृद्धि हुई है, जहां अपराधी भोले-भाले नागरिकों को उच्च रिटर्न और कम समय में दोगुने लाभ का झांसा देकर उनकी मेहनत की कमाई ठग रहे हैं। पुलिस ने इन जालसाजियों के नए तरीकों और उनसे बचने के उपायों के बारे में नागरिकों को सचेत किया है।
उपमहानिरीक्षक साइबर क्राइम विकास शर्मा ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को फंसाने के लिए सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल और नकली वेबसाइटों का उपयोग कर रहे हैं।
उच्च रिटर्न का झांसा- कम समय में दोगुना या बहुत अधिक लाभ का वादा करना।
नकली वेबसाइट/एप- असली कंपनियों जैसी दिखने वाली नकली साइट या एप बनाकर निवेश कराना।
सोशल मीडिया प्रचार- व्हाट्सऐप या टेलीग्राम पर आकर्षक लिंक भेजकर लोगों को जोड़ना ।
डीपफेक/फर्जी वीडियो- किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के नाम या चेहरे का गलत उपयोग करके फर्जी वीडियो बनाना।
नकली तात्कालिक सूचना- अभी भुगतान न करने पर अवसर छूट जाएगा या खाता ब्लॉक हो जाएगा जैसी धमकियाँ देना।
छोटी रकम से शुरुआत- पहले छोटा लाभ दिखाकर भरोसा जीतना और फिर अधिक पैसा निवेश करवाना।
निरंतर संपर्क- कॉल और मैसेज के जरिए भरोसा जीतने की कोशिश
यदि धोखेबाज ने आपको किसी भारतीय नंबर से संपर्क किया है, तो उस नंबर पर सामान्य कॉल करके जाँच करें। यदि कॉल करने पर बताया जाता है कि नंबर नही लगे या स्विच ऑफ है, तो यह लगभग निश्चित है कि वह नंबर साइबर अपराधी द्वारा उपयोग लिया जा रहा है। ऐसे में धनराशि भेजने से बचें और तुरंत रिपोर्ट करें।
डीआईजी शर्मा ने बताया कि जल्दी अमीर बनने वाली योजनाएं अक्सर धोखाधड़ी होती हैं। यदि आप इस प्रकार की घटना का शिकार होते हैं, तो इसकी सूचना तुरंत दें…
साइबर हेल्प लाइन नंबर 1930
साइबर हेल्प डेस्क नंबर: 92560-01930 और 925751-10100
ऑनलाइन रिपोर्टिंग पोर्टल:cybercrime.gov.in
निकटतम पुलिस स्टेशन / साइबर पुलिस स्टेशन।