
राजस्थान में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और तकनीकी पुलिसिंग के मोर्चे पर जमीनी हकीकत क्या है, इसे लेकर महानिदेशक पुलिस (DGP) राजीव कुमार शर्मा ने सोमवार को राजस्थान पुलिस का पिछले 6 महीने का रिपोर्ट कार्ड जारी किया। राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA) में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेश इस रिपोर्ट कार्ड के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस वर्ष भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज होने वाले गंभीर अपराधों में 4.65 प्रतिशत की एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जहां आंकड़े 99,272 से घटकर 94,652 रह गए हैं। हालांकि, इस रिपोर्ट कार्ड का एक दूसरा पहलू यह भी दिखाता है कि भले ही हत्या, लूट और महिला उत्पीड़न के मामलों में काफी कमी आई हो, लेकिन बदलते दौर के साथ प्रदेश में बढ़ते साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं और संगठित गैंगस्टर्स द्वारा रंगदारी के लिए की जाने वाली फायरिंग जैसी नई आपराधिक प्रवृत्तियां आज भी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों का गहन विश्लेषण करें, तो राज्य में अपराध के लगभग सभी मुख्य मोर्चों पर कागजी तौर पर एक बड़ी राहत मिलती हुई दिखाई दे रही है। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में हत्या के मामलों में 4.41% (703 से घटकर 672) और लूट की वारदातों में 19.93% (577 से घटकर 462) की कमी आई है।
पुलिस द्वारा खुद आगे बढ़कर की गई आक्रामक कार्रवाई (स्वतः कार्रवाई) के कारण स्थानीय और विशेष अधिनियमों (जैसे आर्म्स एक्ट, आबकारी एक्ट) के तहत दर्ज मामलों में 4.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
यह इस बात का साफ संकेत है कि पुलिस अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार सक्रिय है, लेकिन समाज में अवैध हथियारों और अवैध शराब की पैठ पूरी तरह खत्म करना अभी भी बाकी है।
राजस्थान पुलिस के इस रिपोर्ट कार्ड में सबसे ऐतिहासिक और सकारात्मक सुधार संपत्ति संबंधी अपराधों में माल की बरामदगी को लेकर सामने आया है। पुलिस के विशेष अभियानों के चलते लूट के मामलों में माल रिकवरी का प्रतिशत 71% से बढ़कर 79.09% हो गया है।
सबसे चौंकाने वाला सुधार नकबजनी जैसे मामलों में देखा गया है, जहां माल बरामदगी का स्तर महज 9.58% के बेहद खराब रिकॉर्ड से लंबी छलांग लगाते हुए 58.24% तक पहुंच चुका है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि चोरी और नकबजनी की वारदातों को होने से पहले ही रोकना पुलिस के लिए आज भी एक टेढ़ी खीर बना हुआ है, क्योंकि शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में रात्रि गश्त को लेकर स्थानीय निवासियों में अब भी शिकायतें देखने को मिलती हैं।
महिला सुरक्षा और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों को लेकर राजस्थान पुलिस की कार्यकुशलता में बड़ा प्रशासनिक सुधार हुआ है। एडीजी सिविल राइट्स के अधीन की गई सख्त मॉनिटरिंग के कारण पोक्सो मामलों में पुलिस का औसत अनुसंधान समय जो वर्ष 2024-25 में 78.2 दिन हुआ करता था, वह वर्ष 2025-26 में घटकर महज 51.2 दिन रह गया है। इसी तरह रेप के मामलों में भी जांच का समय 81 दिन से घटकर 52 दिन पर आ गया है।
आंकड़ों के अनुसार बालिक दुष्कर्म के मामलों में 13.36% और पॉक्सो के मामलों में 20.90% की गिरावट आई है। पुलिस ने महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए कालिका पेट्रोल यूनिट, एंटी रोमियो स्क्वाड और सुरक्षा सखी जैसी प्रणालियों को ऑपरेशन गरिमा के तहत एक्टिव किया है, लेकिन धरातल पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले मानसिक उत्पीड़न और सरेराह छेड़छाड़ की घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगाना अभी भी एक लंबी प्रक्रिया है।
इस पूरे रिपोर्ट कार्ड का सबसे कमजोर और चिंताजनक पहलू साइबर अपराधों की लगातार बढ़ती संख्या है। तकनीकी रूप से अपग्रेड हो रहे ठगों ने राजस्थान के आम नागरिकों की नाक में दम कर रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले 30 जून 2026 तक प्रदेश में 84,916 साइबर शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं, जो यह बताती हैं कि साइबर अपराधी कितनी तेजी से सक्रिय हैं।
हालांकि, राजस्थान पुलिस ने साइबर शील्ड और ऑपरेशन एंटी वायरस के जरिए 26.47 प्रतिशत राशि होल्ड करने में सफलता पाई है और 5 लाख रुपये तक के अपराधों के लिए 'जीरो-एफआईआर' की सुविधा भी शुरू की है, लेकिन डिजिटल अरेस्ट जैसे नए दौर के गंभीर अपराधों ने आम जनता के बीच एक बड़ा मानसिक डर पैदा कर दिया है।
1.84 लाख गुमशुदा मोबाइलों में से पुलिस केवल 61,346 मोबाइल ही उनके मालिकों को लौटा पाई है, जो यह साबित करता है कि रिकवरी की रफ्तार को और तेज करने की जरूरत है।
अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ राजस्थान पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत रिकॉर्ड 29.94% अधिक मामले दर्ज कर बड़े ड्रग सिंडिकेट्स को ध्वस्त करने का दावा किया है। पुलिस ने नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए 20 जिलों में 224 हॉटस्पॉट (किंग पिन) को चिन्हित कर विशेष कार्रवाई की है।
सबसे बड़ा प्रहार तस्करों की आर्थिक कमर पर किया गया है, जिसके तहत वर्ष 2025 में 55.01 करोड़ रुपये और वर्ष 2026 में अब तक 7.36 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध संपत्तियों पर सीधे बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एटीएस (ATS) की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए डीजीपी ने बताया कि आतंकवाद और संगठित अपराध के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए यूएपीए (UAPA) के तहत 3 मामले दर्ज कर खतरनाक आरोपियों को दबोचा गया है।
इसके अलावा, सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखते हुए कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित 15 युवाओं की काउंसलिंग कर उनकी डी-रेडिकलाइजेशन प्रक्रिया शुरू की गई है।
आंतरिक सुधारों की बात करें तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर गृह विभाग ने 23 जून 2026 को एक बड़ा फैसला लेते हुए पुलिस के तकनीकी संवर्ग (चालक, घुड़सवार, बैंड शाखा) के 403 पदों को उच्च पदों में पुनर्गठित कर दिया है, जिससे लंबे समय से अटकी पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है।
भविष्य की रणनीति साझा करते हुए डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने साफ किया कि राजस्थान पुलिस अब केवल पारंपरिक जांच तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले दिनों में नए कानूनों (BNSS) की धाराओं के तहत बड़े तस्करों की काली कमाई से अर्जित संपत्तियों को बड़े स्तर पर कुर्क व जब्त किया जाएगा। रंगदारी और फिरौती के लिए व्यापारियों पर फायरिंग करने वाले और सोशल मीडिया पर धमकियां देने वाले विदेशी गैंगस्टर्स को पकड़ने के लिए एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) को पूरी छूट दी गई है, जो जरूरत पड़ने पर विदेशों से भी अपराधियों का प्रत्यर्पण कराएगी। इस मौके पर एटीएफ व एटीएस के एडीयू दिनेश एमएन ने भी मीडिया के तीखे सवालों के जवाब देते हुए पुलिस की मुस्तैदी का भरोसा दिलाया।