
विकास सिंह
जयपुर। बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कुंवरपुरा गांव में जर्जर सरकारी स्कूल को लेकर विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक खींचतान में बदल गया है। स्कूल की बदहाल स्थिति सामने लाने पहुंची सीजेपी की टीम के साथ टकराव के बाद मामला चर्चा में है। पत्रिका ने स्थानीय लोगों से बातचीत और मौके से जुटाई जानकारी में सामने आया कि स्कूल भवन की समस्या के साथ गांव में गुटबाजी और सामाजिक मतभेद भी विवाद को बढ़ा रहे है।
विद्यालय पिछले एक-दो साल से जर्जर हालत में है। इसके चलते स्कूल को ग्रामीण रामअवतार शर्मा के पुराने मकान में संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, नए भवन के लिए सरकार की ओर से करीब 12 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। स्कूल संचालन के लिए इस्तेमाल हो रहे भवन के किराए का भुगतान भी लंबित बताया गया है।
ग्रामीण रामावतार ने बताया गांव के राहुल और विराट सीजेपी कार्यकर्ता हैं। वो दिल्ली प्रोटेस्ट में भी गए थे। उन्होंने ही उनको यहां बुलाया। उनका आरोप है कि यह पूरा बवाल चुनाव के समय जानबूझकर किया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच लंबे समय से मतभेद हैं। ग्रामीण रवि धानका ने बताया कि स्कूल में बड़ी संख्या में एसटी वर्ग और गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। कुछ लोग स्कूल बंद करवाना चाहते हैं। वहीं कुछ ग्रामीणों ने गांव के मंदिर और सार्वजनिक स्थलों को लेकर भी सामाजिक मतभेद होने की बात कही। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीण जगदीश शर्मा ने बताया कि सीजेपी की टीम सुबह 8 बजे गांव पहुंची थी। ग्रामीणों ने उन्हें वापस भेज दिया। इसके बाद टीम करीब 9 बजे दोबारा मीडिया के साथ पहुंची, जिसके बाद कहासुनी हुई। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल का निर्माण स्वीकृत राशि से करा दिया जाएगा।
ग्रामीण छोटा देवी शर्मा ने कहा कि स्कूल जर्जर है और इसकी स्थिति सुधरनी चाहिए। उनके अनुसार विवाद में दोनों पक्षों की भूमिका रही, लेकिन स्कूल को ठीक कर बच्चों के लिए बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।
बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल की बदहाल स्थिति का जायजा लेने शुक्रवार सुबह पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की टीम और ग्रामीणों के बीच जमकर हंगामा हो गया। कहासुनी धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गई। कुछ लोगों ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को दौड़ाकर पीटा। सीजेपी ने भाजपा समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया है, जबकि ग्रामीणों ने राजनीतिक दखलअंदाजी का विरोध करते हुए कहा कि वे स्कूल की मरम्मत खुद करा लेंगे।
सुबह करीब आठ बजे सीजेपी के कुछ कार्यकर्ता गांव पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन्हें धक्का-मुक्की कर गांव से बाहर निकाल दिया। इसके बाद ग्रामीण स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने मुख्य रास्ते पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर घेराबंदी कर दी और आने-जाने वाली गाड़ियों की जांच शुरू कर दी। करीब दस बजे आशुतोष रांका के साथ टीम स्कूल पहुंची। तभी ग्रामीणों ने उन्हें पीटकर खदेड़ दिया। गाड़ियों पर पथराव किया गया। रांका के साथ मौजूद महिला समर्थकों पर गांव की महिलाओं ने मिट्टी फेंकी।
सीजेपी पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि ये सब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के कहने पर हुआ है। रांका ने कहा, हम 48 घंटे का अल्टीमेटम दे रहे हैं। हमलावरों की गिरफ्तारी हो और स्कूल निरीक्षण रोकने का आदेश वापस लिया जाए। नहीं तो पूरे राजस्थान में आंदोलन करेंगे और दिलावर के इस्तीफे की मांग करेंगे। उन्होंने बताया कि एक साल पहले भी इसी स्कूल का दौरा किया था। गांव वालों ने ही बुलाया था कि स्कूल की हालत नहीं सुधरी है। सीजेपी की रेखा शर्मा ने बताया कि वाटिका रोड स्थित भट्टा वाले स्कूल का निरीक्षण भी तय था, लेकिन वहां भी अवांछित तत्व जमा हो गए। उधर, सीजेपी संयोजक अभिजीत दिपके ने मांगें नहीं मानने पर जयपुर में जंतर-मंतर जैसे धरने की चेतावनी दी है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि विद्यालय में जाकर व्यवधान पैदा करने का प्रयास करना या व्यवधान पैदा करना ठीक नहीं है। गांव वालों ने अपने विद्यालय की सुरक्षा की है, मैं उनको बधाई देता हूं। हमने इतना कहा है कि हमारे विद्यालय सुरक्षित रहने चाहिए, मर्यादा में रहने चाहिए और उनकी निजता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। किसी को विद्यालय में जाना है तो संस्था प्रधान से अनुमति लें।