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CAG Report: गहलोत शासन में 25 बजट घोषणाएं कागजों में, भजनलाल सरकार में ₹8409 करोड़ का अतिरिक्त बजट भी नहीं हुआ पूरा खर्च

CAG रिपोर्ट में राजस्थान के वित्तीय प्रबंधन की कमजोरियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गहलोत सरकार की 25 बजट घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं, जबकि भजनलाल सरकार के दौरान ₹8,409 करोड़ का अतिरिक्त बजट मंजूर होने के बावजूद मूल बजट का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हुआ।
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ashok gehlot bhajnlal sharma

पूर्व CM अशोक गहलोत और CM भजनलाल शर्मा का फोटो: पत्रिका

Rajasthan News: नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) ने वित्तीय प्रबंधन में राजस्थान की पिछले 7 साल की कमजोरियों को उजागर किया है वहीं ये भी खुलासा किया है कि अशोक गहलोत के शासन के आखिरी वर्ष और भजनलाल सरकार के पहले वर्ष, दोनों में ही सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में वार्षिक वृद्धि 12% से ऊपर रही। अशोक गहलोत के शासन में 25 घोषणाएं ऐसी रहीं, जिनकाे बजट में वादा किए जाने के बावजूद धरातल पर नहीं लाया गया। इसी तरह भजनलाल सरकार के पहले साल में विधानसभा से 8409 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बजट पारित करवाया लेकिन हकीकत ये रही है कि मूल बजट से ही 269 करोड़ रुपए बच गए।

उपमुख्यमंत्री दियाकुमारी ने राज्य की वित्तीय स्थिति के वर्ष 2024-25 के आंकड़ों पर आधारित सीएजी की यह रिपोर्ट शुक्रवार को विधानसभा में पेश की। इसमें खुलासा किया गया है कि खर्चों की पूर्ति के लिए राज्य सरकार को 271 दिनों के लिए एडवांस लेना पड़ा जिस पर 181 करोड़ रुपए ब्याज चुकाया गया।

इन वित्तीय कमजोरियों का भी खुलासा

वर्ष 2024-25 में नियमित खर्चों को पूरा करने के लिए रिजर्व बैंक से 133 बार अग्रिम भुगतान लिया कुल 271 दिनों के लिए इस सुविधा का उपयोग किया जिसके लिए 180 करोड़ रुपए ब्याज का भुगतान किया।

वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान जो राशि उधार ली उसका बड़ा हिस्सा परिसम्पत्ति निर्माण के स्थान पर पुराने ऋण को चुकाने खर्च किया। साल 2024-25 में उधारी के 42,090 करोड़ रुपए को नियमित खर्चों को पूरा करने में उपयोग किया।

वर्ष 2024-25 में 21 मामले ऐसे सामने आए जिनमें 8409.73 करोड़ रुपए अतिरिक्त बजट लिया गया लेकिन मूल बजट ही 21591 करोड़ रुपए खर्च हुए बिना शेष रह गया। 13 मामले ऐसे, जिनमें 8663.31 करोड़ का अतिरिक्त बजट मंजूर कराया लेकिन उसे खर्च ही नहीं किया।

60 विभागों की 151 योजनाओं के लिए स्वीकृत 5070 करोड़ का बजट खर्च करने के बजाय लौटा दिया। गहलोत शासन में वर्ष 2019-20 से 2022-24 के बीच 25 बजट घोषणाएं ऐसी रहीं जिनको पूरा करने के लिए कदम नहीं बढ़ाया।

इसमें खुलासा हुआ कि खर्चों की पूर्ति के लिए राज्य सरकार को 271 दिनों के लिए एडवांस लेना पड़ा, जिस पर 181 करोड़ रुपए ब्याज चुकाया गया। इस तरह सरकार पर निजी क्षेत्र की उधारी बढ़ गई, वहीं उधार ली गई राशि से परिसम्पत्तियां बनाने के बजाय उसे उधार चुकाने पर और नियमित जरूरतों को पूरा करने पर खर्च किया गया।

आंकड़ों में राजस्थान की वित्तीय स्थिति : जीएसडीपीः वर्ष 2024-25 में 12.02 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि से 17,04,339 करोड़ रुपए, जिसने वर्ष 2023-24 में 12.17 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि से 15,21,510 करोड़ रुपए को छू लिया था। राज्य की जीएसडीपी देश की जीडीपी का 5.15 प्रतिशत है।

राजस्वः वर्ष 2024-25 में राजस्व घाटा 41,950 करोड़ रुपए रहा, जो उससे पिछले वर्ष की तुलना में 7.69 प्रतिशत अधिक था।