जयपुर

650 ध्वज लेकर चलेंगे पैदल, सडकों पर हिलोर लेगा श्रदृधा का सैलाब

टोंक जिले के निवाई क्षेत्र में जोधपुरिया स्थित भगवान देवनारायण का भव्य मंदिर है। यहां हर साल लाखों की संख्या में गुर्जर—श्रदृधालु ध्वज पताकाएं लेकर पैदल यात्रा के रूप में आते हैं। राजस्थान, हरियाण, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब से लाखों की तादाद में श्रदृधालु यहां धोक लगाने आते हैं। भीलवाडा के आसींद बूंदी और अजमेर में भी देवनारायण भगवान के भव्य मंदिर हैं।
2 min read
Aug 28, 2018
jaipur padyatra
jaipur

जयपुर. राजस्थान के लोकदेवता देवनारायण वीर योदृधा थे। पौराणिक कहानियों में उन्हें कई जगह भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। टोंक जिले के निवाई क्षेत्र में जोधपुरिया स्थित भगवान देवनारायण का भव्य मंदिर है। यहां हर साल लाखों की संख्या में गुर्जर—श्रदृधालु ध्वज पताकाएं लेकर पैदल यात्रा के रूप में आते हैं। राजस्थान, हरियाण, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब से लाखों की तादाद में श्रदृधालु यहां धोक लगाने आते हैं। भीलवाडा के आसींद बूंदी और अजमेर में भी देवनारायण भगवान के भव्य मंदिर हैं।


देवधाम जोधपुरिया के लिए 32वीं ध्वज पदयात्रा 11 सितम्बर को

श्रीदेवनारायण जन-कल्याण संस्थान के तत्वावधान में देवधाम जोधपुरिया के लिए 32वीं ध्वज पदयात्रा 11 सितम्बर को सुबह 11ण्15बजे पुरानी बस्ती स्थित देवनारायण मंदिर से रवाना होगी। संस्थान के प्रदेश महामंत्री हरिनारायण मणकस ने बताया कि शहरभर से आए 250 ध्वजों के साथ शहर में शोभायात्रा निकाली जाएगी। मणकस ने बताया कि ध्वज पदयात्रा 11 सितम्बर को जयपुर से गोनेर, अगले दिन गोनेर से चाकसू, इसके बाद चाकसू से निवाई तथा 14 सितम्बर को 650 ध्वजों व करीब 3 लाख पदयात्रियों के साथ जाधपुरिया पहुंचेगी। जिसमें हरियाणा, दिल्ली, सीकर, अलवर, सवाई माधोपुर, करौली, टोंक, भरतपुर, दौसा व जयपुर जिले के पदयात्री शामिल होंगे। यहां श्रद्धालु देवनारायण भगवान के दर्शन करेंगे।


प्रकति की गोद में बसा जोधपुरिया

भगवान देवनारायण का मंदिर प्रकति की गोद में बसा हुआ हैं। तीन तरफ मांसी बांध में हिलोरे लेता अथाह जल और एक तरपफ बिखरी हरियाली। मंदिर में पदयात्रा के लिए कई दिन पहले से तैयारियां शुरू हो जाती है। सामान्य दिनों में भी लोग यहां घूमने, गोठ करने और दर्शन करने आते रहते हैं। पैदल यात्रा के दौरान प्रतिदिन यहां हजारों लोग सुबह—शाम भोजन करते हैं। सुरक्षा व यातायात के विशेष इंतजाम किए जाते हैं तो हजारों लोग स्वैच्छा से स्वयंसेवक के रूप में अपनी सेवाए ंदेते हैं। इस दौरान मंदिर में कई धार्मिक आयोजन भी होते हैं।

Published on:
28 Aug 2018 01:53 am