जयपुर

RGHS: राजस्थान में पेंशनर्स के लिए ‘सजा’ बनती जा रही योजना, सुधार की बातें, पर हकीकत कुछ और

RGHS: राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) को वित्त विभाग से स्वास्थ्य विभाग को सौंपे जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पेंशनर्स और सरकारी कर्मचारियों को इलाज में राहत मिलेगी।
2 min read
• •
Aug 07, 2025
RGHS
​पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) को वित्त विभाग से स्वास्थ्य विभाग को सौंपे जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पेंशनर्स और सरकारी कर्मचारियों को इलाज में राहत मिलेगी।

लेकिन जमीनी हालात अब भी जस के तस हैं। कुछ निजी अस्पतालों की मनमानी और आरजीएचएस की जटिल प्रक्रियाएं बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए यह योजना ‘सहूलियत’ नहीं, ‘सजा’ बनती जा रही है।

ओपीडी परामर्श के लिए सुबह-सुबह कतार में बुजुर्ग

राजधानी के कुछ निजी अस्पतालों में बुजुर्ग पेंशनर्स को ओपीडी के लिए सुबह 8:30 बजे से पहले टोकन के लिए लाइन में लगना पड़ता है। 70 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों को भी कतार में खड़ा रहना पड़ता है-वह भी खुद, किसी सहायक के बिना। फिर 9 बजे पर्ची कटवाने और 11 बजे डॉक्टर से परामर्श पाने के लिए और प्रतीक्षा। नकद भुगतान करने वाले मरीजों को तरजीह दी जाती है, जबकि आरजीएचएस कार्डधारियों के साथ भेदभाव किया जाता है।

बिना भर्ती नहीं जांच, न भुगतान, न इजाजत

एमआरआइ, सिटी एंजियोग्राफी जैसी जांचें तब तक नहीं होतीं, जब तक मरीज को अस्पताल में भर्ती न कर लिया जाए। योजना में बिना भर्ती हुए सेकंडरी इलाज का भुगतान नहीं होता, और अस्पताल भी इसे मानने को तैयार नहीं होते।

लिमिट खत्म, डॉक्टर सीमित, इलाज टलता रहा

कई अस्पतालों में आरजीएचएस मरीजों की सीमा तय है। कुछ डॉक्टरों को 5 से 10 आरजीएचएस मरीज ही देखने की अनुमति दी गई है। नकद भुगतान करने वाले मरीजों को डॉक्टर के सामने बैठाना प्राथमिकता बन चुका है क्योंकि वहीं ‘मुनाफा’ है।

सुधार की बातें, पर हकीकत कुछ और

स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारी लगातार योजना में सुधार की बात कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत पेंशनर्स की पीड़ा बयान कर रही है। बुधवार को मानसरोवर स्थित एक निजी अस्पताल में गए पेंशनर ने कहा कि उन्होंने जीवनभर सरकार को सेवा दी, अब इलाज के लिए हाथ फैलाना पड़ रहा है।

हर बार नया नियम, नया फार्म, नया चक्कर… शरीर बीमार है और तंत्र संवेदनहीन… 65 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक ने बताया कि पर्ची कटवाने में ही उनके ढाई घंटे लग गए, और वह भी खुद लाइन में लगकर। यह तो योजना के नाम पर सजा देना जैसा है।

Updated on:
07 Aug 2025 07:31 am
Published on:
07 Aug 2025 07:31 am
Also Read
View All
Rajasthan Panchayat Election : ‘मिशन पंचायत चुनाव’ में कांग्रेस का बड़ा दांव, 152 जिला समन्वयकों की जंबो लिस्ट जारी

‘होटल की नहीं, गांव के चूल्हे की चाय पीऊंगा’, नाना पाटेकर का राजस्थान से जुड़ा दिलचस्प किस्सा, जब इंटरव्यू से पहले रखी थी शर्त

अरावली हिल्स पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम: वागड़ आ रही हाई पावर्ड कमेटी, डूंगरपुर और बांसवाड़ा में करेगी जांच

राजस्थान में फिर बदलेगा मौसम: 10-11 अक्टूबर को बारिश-तेज हवा का अलर्ट, पिलानी सबसे गर्म और माउंट आबू सबसे ठंडा

Rajasthan Politics: ‘चापलूसी न मेरे खून में, ना ही कभी करूंगा’,  पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह का नया ‘सियासी बम’! कांग्रेस में फिर हड़कंप