
जिस पुलिस विभाग के नाम से राज्य के अपराधियों में खौफ और खलबली का माहौल पैदा हो जाता है, आज उसी राजस्थान राज्य पुलिस के महकमे में एक निर्णय के कारण खलबली मची हुई है। दरअसल, राजस्थान राज्य पुलिस सेवा में सुपर टाइम स्केल कैडर रिव्यू में निर्धारित एक फीसदी कोटा कम करने से राज्य पुलिस सेवा परिषद में खलबली मच गई है। अब तक इस स्केल में कैडर का 12 फीसदी कोटा सरकार ने निर्धारित कर रखा है। लेकिन सरकार के स्तर पर पिरामिड सिस्टम की आड लेकर उसे एक फीसदी कम किया जा रहा है। जिस कारण पुलिस सेवा परिषद इसे लेकर नाराजगी भी दिखी।
अभी तक निर्धारित 12 फीसदी कोटा होने से सुपर टाइम स्केल के कारण 106 पदों पर अफसरों को लाभ मिलता है, जबकि एक फीसदी कोटा कम होने से यह संख्या 96 रह जाएगी। इतना ही नहीं कोटा कम होने से आरक्षित वर्ग के अफसरों को सीधा लाभ मिलेगा और एक फीसदी वंचित अफसरों को अगले तीन साल तक और इंतजार करना पड़ जाएगा।
तो वहीं इस मामले को लेकर राजस्थान पुलिस सेवा परिषद ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया और मुख्य सचिव से लेकर हर स्तर पर ज्ञापन देकर 106 सुपर टाइम स्केल के पदों को यथावत रखने की अपनी मांग की है। जबकि पुलिस सेवा परिषद ने अपने सौंपे गए ज्ञापन में बताया है कि साल 2011 में सरकार ने एक नीतिगत फैसला लेते हुए निर्धारित किया था कि 18 साल की सर्विस पूरी करने वाले राज्य कैडर के पुलिस अफसरों को 12 फीसदी कोटा दिया जाएगा। लेकिन अब एक फीसदी कोटा कम होने से वो इससे वंचित भी हो सकते हैं।
गौरतलब है कि हायर सुपर टाइम स्केल में यह कोटा 8 फीसदी होगा और इसके लिए 25 साल की सर्विस जरुरी होगी। इसी साल आरएएस को सुपर टाइम स्केल में प्रमोशन किया गया है, जबकि आरपीएस का मामला अभी तक अटका पड़ा है।