जयपुर

Rajasthan SI Exam 2021 : अब फिर आया ‘ज़बरदस्त’ मोड़- RPSC को ‘झटका’! जानें राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला?

SI भर्ती-2021 पुन: परीक्षा पर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! जस्टिस आनंद शर्मा की कोर्ट ने RPSC को दिया आदेश, याचिकाकर्ताओं को फॉर्म एडिट का मौका देकर एग्जाम में करें शामिल।
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Updated: 20 May 2026, 1:45 PM IST
RPSC SI Recruitment 2021 Update
RPSC SI Recruitment 2021 Update

राजस्थान की सबसे चर्चित और कानूनी दांवपेचों में फंसी सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 को लेकर आज यानी 20 मई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट से एक ऐसा ऐतिहासिक आदेश आया है, जिसने इस परीक्षा की पूरी स्क्रिप्ट को एक नया मोड़ दे दिया है। आरपीएससी (RPSC) जो अब तक केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में बैठने की अनुमति दे रहा था जिन्होंने साल 2021 की मुख्य परीक्षा के दोनों पेपर दिए थे, उसे कोर्ट ने कड़ा सबक सिखाया है।

जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने प्रश्नजीत सिंह, देवेंद्र सैनी, मधुसूदन शर्मा और अन्य अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आरपीएससी को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं को तुरंत पोर्टल पर फॉर्म एडिट करने का चांस दें और उन्हें प्रोविजनल तौर पर परीक्षा में शामिल करें। कोर्ट के इस फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों में खुशी की लहर है जो किसी कारणवश पिछली बार एग्जाम हॉल तक नहीं पहुंच पाए थे।

क्या था पूरा विवाद?

इस पूरे विवाद की जड़ आरपीएससी द्वारा 8 मई 2026 को जारी किया गया एक प्रेस नोट है। इस प्रेस नोट में आयोग ने केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को 16 मई से 30 मई 2026 तक अपने आवेदन फॉर्म में संशोधन (Edit) करने का मौका दिया था, जो 13 से 15 सितंबर 2021 के बीच आयोजित हुई लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्न पत्रों में उपस्थित रहे थे।

याचिकाकर्ताओं का तर्क: अभ्यर्थियों ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने साल 2021 में फॉर्म तो भरा था और फीस भी जमा की थी, लेकिन किसी व्यक्तिगत या अपरिहार्य कारणों से वे दोनों पेपर नहीं दे पाए थे।

भेदभाव का आरोप: जब सरकार पूरी भर्ती को रद्द करके नए सिरे से दोबारा परीक्षा (Re-Exam) करवा रही है, तो पुराने सभी रजिस्टर्ड आवेदकों को मौका मिलना चाहिए। सिर्फ आधे पेपर देने वालों को ही चुनना सरासर गलत है।

RPSC की दलील कोर्ट में 'धड़ाम'

सुनवाई के दौरान राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के वकीलों ने कोर्ट के सामने हाथ खड़े करते हुए अपनी प्रशासनिक लाचारी व्यक्त की थी। आरपीएससी ने दलील दी कि अगर वे सभी आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को इस पुन: परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देते हैं, तो उनके सामने एक बहुत बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो जाएगा।

आरपीएससी ने अदालत में ये 3 मुख्य दलीलें रखी थीं:

बड़ी संख्या: "4 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने साल 2021 में केवल एप्लीकेशन फॉर्म भरा था, लेकिन वे परीक्षा देने नहीं आए थे।"

छंटनी की सिरदर्दी: "अगर इन सभी 4 लाख से अधिक लोगों को दोबारा अलाऊ किया जाता है, तो हमें इनके डॉक्यूमेंट्स और फॉर्म की अतिरिक्त छंटनी (Scrutiny) करनी होगी, जो इस समय बेहद मुश्किल और जटिल कार्य है।"

नौकरी और पढ़ाई छोड़ना: "इन 4 वर्षों में कई अभ्यर्थी कहीं और नौकरी लग चुके होंगे या तैयारी छोड़ चुके होंगे, इसलिए इन्हें बाहर रखना ही सही है।"

कोर्ट का रुख: हाईकोर्ट ने आरपीएससी की इस प्रशासनिक कठिनाई की दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया और कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था की दुहाई देकर अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों को नहीं छीना जा सकता।

वकीलों ने दीं पुरानी भर्तियों की मिसालें

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट्स— रघुनंदन शर्मा, रामप्रताप सैनी, निखिल कुमावत और रविंद्र सैनी ने कोर्ट के सामने समानता के अधिकार का सबसे मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आरपीएससी का यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (अवसर की समानता) का सीधा उल्लंघन है।

इसके समर्थन में उन्होंने राजस्थान की ही पुरानी रद्द हुई भर्तियों के उदाहरण कोर्ट के सामने पेश किए-
EO-RO भर्ती का उदाहरण: इस भर्ती परीक्षा के रद्द होने के बाद जब दोबारा एग्जाम हुआ, तो उन सभी लोगों को बिठाया गया जिन्होंने सिर्फ फॉर्म भरा था, चाहे वे पहली बार एग्जाम में आए हों या नहीं।

LDC भर्ती का नियम: एलडीसी भर्ती में भी यही समान नियम अपनाया गया था। वकीलों ने कहा कि जब उन भर्तियों में सभी आवेदनकर्ताओं को दोबारा मौका मिला, तो फिर एसआई भर्ती-2021 की पुन: परीक्षा में यह दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है?

आंकड़ों का खेल: 7.95 लाख कुल आवेदक, लेकिन RPSC सिर्फ 3.83 लाख को ही दे रहा था भाव
इस पूरी भर्ती के आंकड़ों को देखें तो समझ आता है कि आरपीएससी आखिर क्यों इतने बड़े वर्ग को परीक्षा से बाहर रखने की जिद पर अड़ा हुआ था। नीचे दी गई तालिका से आप इस पूरे भर्ती के गणित को आसानी से समझ सकते हैं:

SI भर्ती-2021 का पूरा डेटा शीट

विवरण (Description)अभ्यर्थियों की कुल संख्या (Total Candidates)
कुल आवेदन करने वाले अभ्यर्थी (Total Applied)7,95,000+ (करीब 7.95 लाख)
2021 की मुख्य परीक्षा में बैठने वाले (Both Papers)3,83,097 (करीब 3.83 लाख)
परीक्षा छोड़ देने वाले अभ्यर्थी (Absent Candidates)4,11,903 (करीब 4.11 लाख)
RPSC द्वारा पहले स्वीकृत अभ्यर्थीकेवल 3,83,097 अभ्यर्थी
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद राहतयाचिकाकर्ताओं को फॉर्म एडिट और प्रोविजनल एंट्री मिली

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला, जानिए पूरी टाइमलाइन

यह एसआई भर्ती-2021 राजस्थान के इतिहास की सबसे विवादित भर्तियों में से एक बन चुकी है। पेपर लीक और डमी कैंडिडेट के आरोपों के बाद यह मामला लगातार अदालतों के चक्कर काट रहा है:

28 अगस्त 2025: राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कथित धांधली के कारण इस पूरी एसआई भर्ती-2021 को रद्द (Cancel) करने का आदेश दिया था।

4 अप्रैल 2026: हाईकोर्ट की खंडपीठ (Division Bench) ने एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए भर्ती रद्द रखने के आदेश को बरकरार रखा।

4 मई 2026: ट्रेनिंग ले रहे चयनित सब-इंस्पेक्टर्स इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने उनकी स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को सिरे से खारिज कर दिया, जिससे दोबारा परीक्षा का रास्ता साफ हो गया।

अन्य अभ्यर्थियों के लिए भी खुल सकते हैं रास्ते

हालांकि राजस्थान हाईकोर्ट का यह आदेश अभी केवल 'याचिकाकर्ताओं' के लिए एक अंतरिम राहत के रूप में आया है, लेकिन कानूनी जानकारों का मानना है कि इस फैसले के आधार पर आने वाले दिनों में उन सभी 4.11 लाख अभ्यर्थियों के लिए भी रास्ते खुल सकते हैं जो साल 2021 में परीक्षा नहीं दे पाए थे।

आरपीएससी को अब अपने ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी बदलाव करने होंगे ताकि कोर्ट के आदेशानुसार याचिकाकर्ताओं को 30 मई की अंतिम तिथि से पहले अपने फॉर्म एडिट करने का मौका मिल सके। समर सीजन में राजस्थान के बेरोजगारों के लिए यह अदालती फैसला एक बहुत बड़ी संजीवनी साबित होने वाला है।

Updated on:
20 May 2026, 1:45 PM IST
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