
राजस्थान में पुराने बर्तनों में पोषाहार खाने की मजबूर स्कूली बच्चे (पत्रिका फोटो)
-विजय शर्मा
जयपुर: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर स्कूलों को स्वयं बर्तन खरीदने का अधिकार देना चाहते हैं, जबकि विभागीय अधिकारी केंद्रीकृत खरीद व्यवस्था के पक्ष में हैं। इस खींचतान के चलते करीब 72 करोड़ रुपए का बजट मंजूर होने के बावजूद प्रदेश के 53,738 सरकारी स्कूलों में नए बर्तन नहीं पहुंच पाए हैं। बच्चे पुराने और जर्जर बर्तनों में पोषाहार खाने को मजबूर हैं। दरअसल, बर्तनों की खरीद स्कूल स्तर पर विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति (एसडीएमसी) के माध्यम से करने या केंद्रीकृत व्यवस्था अपनाने को लेकर विभाग में सहमति नहीं बन पा रही है।
शिक्षा मंत्री एसडीएमसी के माध्यम से स्कूल स्तर पर खरीद कराने के पक्ष में हैं। वहीं, अधिकारी एकसमान गुणवत्ता, दरों में एकरूपता और वित्तीय नियंत्रण के लिए केंद्रीकृत खरीद को बेहतर मान रहे हैं। इसी मतभेद के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पोषाहार के लिए बर्तन आखिरी बार साल 2009 में बदले गए थे। अब पांच साल या उससे अधिक पुराने और खराब हो चुके चूल्हे, पतीले, खाद्यान्न रखने के कंटेनर तथा खाना पकाने और परोसने के बर्तन बदले जाने हैं। इसके लिए 53,738 स्कूलों की सूची तैयार की गई है।
10 हजार रुपए: 50 तक विद्यार्थियों वाले 25,476 स्कूलों को।
15 हजार रुपए: 51 से 150 विद्यार्थियों वाले 21,412 स्कूलों को।
20 हजार रुपए: 151 से 250 विद्यार्थियों वाले 5,620 स्कूलों को।
25 हजार रुपए: 251 या अधिक विद्यार्थियों वाले 1,230 स्कूलों को।
बर्तन और किचन उपकरण बदलने के लिए कुल 71 करोड़ 90 लाख 90 हजार रुपए निर्धारित किए गए हैं। इसमें केंद्र का हिस्सा 43 करोड़ 14 लाख 54 हजार रुपए और राज्य का हिस्सा 28 करोड़ 76 लाख 36 हजार रुपए है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि उन्होंने एसडीएमसी के माध्यम से बर्तन खरीदने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों को अपनी जरूरत के बर्तनों की जानकारी होती है। प्रक्रिया जल्द शुरू कराने के लिए अधिकारियों से बात करेंगे।
Updated on:
23 Oct 2026, 10:45 AM IST
Published on:
23 Oct 2026, 10:43 AM IST
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