
भरतपुर में गंदगी से बेहाल शहर की सुजानगंगा नहर (पत्रिका फोटो)
Bharatpur Sujanganga Canal: भरतपुर शहर की ऐतिहासिक सुजानगंगा नहर को संवारने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च हुए। सुधार के दावे भी किए गए, लेकिन हालात ऐसे हैं कि नहर के पानी में मछलियां मर रही हैं और उनके सड़ने से उठती दुर्गंध राहगीरों को रास्ता बदलने पर मजबूर कर रही है। शहर के केतन गेट से जनाना अस्पताल तक नहर का पानी हरा पड़ गया है। कई जगह काई की मोटी परत ने पानी को ढंक लिया है। जनाना अस्पताल के पीछे मृत मछलियों को निकालने के बजाय श्वान उन्हें खा रहे हैं। जीवनदायिनी कही जाने वाली नहर अब शहर के बीच गंदगी और बदबू का ऐसा ठिकाना बन गई है, जिससे आमजन रोजाना परेशानी झेल रहा है।
केतन गेट से जनाना अस्पताल के बीच सुजानगंगा नहर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब नजर आ रही है। पानी का रंग बदल गया है और कई स्थानों पर काई इतनी अधिक है कि पानी दिखाई तक नहीं देता। मछलियों के मरने और सड़ने से उठने वाली तेज बदबू के कारण नहर के किनारे से गुजरने वाले लोग मुंह पर कपड़ा रखकर निकल रहे हैं। कई राहगीर इस रास्ते से बचने की कोशिश करते हैं, जिससे उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
जनाना अस्पताल के पीछे मृत मछलियों का समय पर निस्तारण नहीं होने से गंदगी और बढ़ रही है। मृत मछलियों को श्वान खाते नजर आ रहे हैं। इससे नहर की सफाई व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुजानगंगा नहर के सुधार और सफाई के लिए भरतपुर विकास प्राधिकरण (बीडीए) और नगर निगम की ओर से करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद स्थिति में स्थायी सुधार नहीं हो पाया है। समय-समय पर सफाई और सुधार के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब नहर पर लगातार काम हो रहा है, तो पानी की गुणवत्ता सुधारने, काई हटाने और मछलियों के मरने की समस्या का स्थायी हल क्यों नहीं निकल रहा।
सुजानगंगा नहर की बदहाली का मामला अब फिर न्यायिक स्तर पर उठाने की तैयारी है। इस संबंध में पहले उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। बाद में मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में पहुंचा। संबंधित पक्षों का कहना है कि सरकार की ओर से पैरवी नहीं होने के कारण मामले में प्रभावी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
इसी सिलसिले में वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ शर्मा के साथ भोपाल के वरिष्ठ अधिवक्ता शांतनु सक्सेना और ओम शंकर श्रीवास्तव ने सुजानगंगा नहर का निरीक्षण किया। श्रीराम शर्मा ने बताया कि वह वर्षों से नहर के सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं। हाल में हुई घोषणाओं के बाद उन्होंने अपने प्रयास कुछ समय के लिए धीमे कर दिए थे, लेकिन मौजूदा हालात से निराश होकर अब दोबारा न्यायालय की शरण लेने की तैयारी कर रहे हैं।
सुजानगंगा नहर में मछलियों के मरने को लेकर कोई जानकारी नहीं आई थी, लेकिन अब ठेकेदार को कहकर जल्द ही सुजानगंगा नहर से मछलियां निकलवाई जाएंगी। सुजानगंगा नहर को लेकर भरतपुर विकास प्राधिकरण परियोजना बना रहा है।
-श्रवण कुमार विश्नोई, आयुक्त, नगर निगम
Updated on:
19 Oct 2026 03:41 pm
Published on:
19 Oct 2026 03:40 pm
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