
जयपुर. राज्य विशेष योग्यजन आयुक्त न्यायालय ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत विशेष योग्यजन बच्चों का अलग कोटा तय नहीं किए जाने व निजी स्कूलों में इन बच्चों के लिए सुविधाओं की अनदेखी को गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने इस मामले में जवाब नहीं आने पर नाराजगी जताते हुए प्रमुख शिक्षा सचिव व माध्यमिक शिक्षा निदेशक को चेतावनी दी है कि अब 15 दिन में जवाब नहीं आया तो विधानसभा में रिपोर्ट पेश की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
विशेष योग्यजन आयुक्त उमाशंकर शर्मा ने इस मामले में शिक्षा विभाग को रिमाइंडर भेजा है। इसमें कहा है कि नया शिक्षा सत्र आ गया है, लेकिन आरटीई में प्रवेश से संबंधित मामले में 4 माह बाद भी न जवाब मिला और न किसी ने स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों ने अब इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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इसलिए लिया था प्रसंज्ञान
न्यायालय ने प्रसंज्ञान लेते समय कहा था कि निजी स्कूलों की ओर से प्रवेश संबंधी विज्ञापन जारी करते समय खेल मैदान सहित स्कूल परिसर में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं की जानकारी तो दी जाती है, लेकिन यह उल्लेख नहीं किया जाता कि स्कूल में विशेष योग्यजन बच्चों के लिए क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं? प्रसंज्ञान आदेश में कहा था कि निजी स्कूलों में विशेष योग्यजन बच्चों को प्रवेश नहीं दिए जाने की मामले भी सामने आए हैं, इन परिस्थितियों में स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया जाना आवश्यक है।
इस मामले में भेजा रिमाइंडर
विशेष योग्यजन आयुक्त न्यायालय ने जनवरी में इस मामले में स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया था। इस मामले में शिक्षा विभाग से आरटीई में 3 साल में विशेष योग्यजन बच्चों को दिलाए गए प्रवेश के बारे में जानकारी मांगी गई थी। साथ ही आगे की तैयारी के बारे में भी पूछा गया था।