
जयपुर। राज्य में बजरी के सस्ते व सुगम विकल्प के रुप में एम सेंड के उपयोग को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए नई इकाइयां लगाने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करेंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस, पेट्रोलियम, उद्योग व एमएसएमई वीनू गुप्ता ने शनिवार को इसकी बैठक लेने के दौरान बताया कि राज्य सरकार की एम-सेंड नीति में सरकारी निर्माण कार्य मेें बजरी के विकल्प के रुप में कम से कम 25 प्रतिशत एम सेंड का उपयोग अनिवार्य है। एम सेंड नीति जारी होने के बाद करीब सवा करोड़ टन एम सेंड का वार्षिक उत्पादन होने लगा है। प्रदेश में निजी और रियल एस्टेट सेक्टर सहित निर्माण सेक्टर में भी एम सेंड के उपयोग को बढ़ावा देने के समन्वित प्रयास करने होंगे।
अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस गुप्ता शनिवार को निदेशक माइंस संदेश नायक व वरिष्ठ अधिकारियोें के साथ खान एवं पेट्रोलियम विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रही थीे। उन्होंने कहा कि राज्य में विपुल खनिज संपदा को देखते हुए खनिज एक्सप्लोरेशन और खनन ब्लॉकों के ऑक्शन कार्य को और अधिक गति देनी होगी। उन्होंने माइंस सेक्टर में रेवेन्यू के उत्तरोत्तर बढ़ोतरी पर प्रसन्नता व्यक्त की और राज्य सरकार द्वारा राजस्व संग्रहण के बढ़ाएं लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए छीजत रोकने और रेवेन्यू बढ़ाने की रणनीति बनाने के निर्देश दिए।
गुप्ता ने आरएसएमईटी, डीएमएफटी, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस सेक्टर सहित इस क्षेत्र में हो रहे कार्यों के साथ ही अंतरविभागीय मुद्दों सहित प्रमुख बिन्दुओं की विस्तार से जानकारी ली। निदेशक माइंस संदेश नायक ने बताया कि राज्य में उपलब्ध 82 खनिजों में से 57 खनिजों का दोहन किया जा रहा है। खान व पेट्रोलियम सेक्टर की ओर से हाल ही समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में रेकार्ड 12 हजार करोड़ से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया है वहीं सर्वाधिक 8 मेजर मिनरल ब्लॉक और 573 हैक्टेयर क्षेत्रफल के 367 माइनर मिनरल ब्लॉकों की सफल नीलामी की गई है।