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Sanitation Survey 2023: स्वच्छता में राजस्थान शर्मसार, काम से ज्यादा ‘राजनीति’ पड़ी भारी, मुकाबला बढ़ा तो बुरी तरह फिसले

Sanitation Survey 2023 Ranking: स्वच्छता में एक बार फिर इंदौर सिरमौर बना और सूरत शहर ने भी पहले स्थान पर पहुंचकर ऊंची उड़ान भरी है, लेकिन राजस्थान की रैंकिंग ने शर्मसार कर दिया।

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Jan 12, 2024

Sanitation Survey 2023 Ranking: स्वच्छता में एक बार फिर इंदौर सिरमौर बना और सूरत शहर ने भी पहले स्थान पर पहुंचकर ऊंची उड़ान भरी है, लेकिन राजस्थान की रैंकिंग ने शर्मसार कर दिया। राज्यों की रैंकिंग में राजस्थान 25वें नम्बर पर रहा, जबकि पिछली बार आठवें नम्बर पर था। महाराष्ट्र ने इसमें बाजी मारी। वहीं, प्रदेश के शहरों की रैंकिंग ही 171 से शुरू हुई, जिसमें नगर निगम हैरिटेज आगे रहा। जबकि, ग्रेटर निगम 173वें स्थान तक मुश्किल से पहुंच पाया। वर्ष 2022 में हैरिटेज 26 और ग्रेटर की 33 वीं रैंक थी।

परेशान करने वाली बात यह है कि देश के शहरों के बीच प्रतिस्पर्द्धा बढ़ी तो प्रदेश के नगरीय निकाय पिछड़ते गए। पिछली बार दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के बीच रैंकिंग में थोड़े आगे बढे और इस बार एक लाख से ज्यादा आबादी वाले सभी शहरों को शामिल किया तो बुरी तरह पिछड़ गए। ऐसे शहरों की संख्या 446 है। इनके अलावा नगर निगमों में जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर, भरतपुर शहरों का नम्बर तो काफी पीछे चला गया।

27 राज्यों में हम 25वें नम्बर पर...
पहला स्थान- महाराष्ट्र (3721.55 अंक)
दूसरा स्थान- मध्य प्रदेश (3657.92 अंक )
तीसरा स्थान- छत्तीसगढ़- (3425.41 अंक)
पच्चीसवां स्थान- राजस्थान (1212.14 अंक)

पिछले तीन वर्ष में प्रदेश की स्थिति
वर्ष 2021- 12वीं रैंकिंग
वर्ष 2022- 8वीं रैंकिंग
वर्ष 2023- 25वी रैंकिंग

जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप भी पड़ा भारी: ज्यादातर निकायों में जनप्रतिनिधि काम से ज्यादा नेतागिरी चमकाने में व्यस्त रहे। लगातार काम में दखल होता रहा। खुद की चहेती कंपनियों को सफाई के टेंडर तक दिलाए गए। काम में लापरवाही होने पर उन्हीं कंपनियों को बचाते रहे। कई निकायों में तो महापौर, सभापति ही सक्रिय नहीं रहे।


इन कामों में रह गए पीछे, कट गए नम्बर
-कचरा मुक्त शहर के लिए प्रभावी काम नहीं किया। अब तक गीला व सूखा कचरे को अलग-अलग संग्रहित करने व्यवस्था ही नहीं। निकाय प्रमुख कचरा संग्रहण व्यवस्था को नियमित चला नहीं पाए।
-निर्माण एवं तोड़फोड वेस्ट (कंस्ट्रक्शन एण्ड डिमोलिशन वेस्ट) किसी भी शहर में शुरू नहीं।
-अपेक्षित जनभागीदारी नहीं करा पाए, जबकि ऐसे हर काम में लोगों का जुड़ाव होना बेहद आवश्यक है।

डूंगरपुर ने बचाई कुछ लाज: कचरा मुक्त शहरों की श्रेणी में हमारे तीन ही शहर हैं। इनमें डूंगरपुर को तीन स्टार और नाथद्वारा व उदयपुर को एक स्टार रैंकिंग मिली है।

एक लाख से ज्यादा आबादी
निकाय-----मिले अंक-----रैंक
जयपुर नगर निगम हैरिटेज—4685.50—171
जयपुर नगर निगम ग्रेटर—4679.60—173
उदयपुर नगर निगम—4230.20—206
जोधपुर दक्षिण नगर निगम—4106.40—210
अजमेर—4064.40—214
कोटा उत्तर नगर निगम—3749.10—244
कोटा दक्षिण नगर निगम—3630.70—256
सीकर नगर निगम—3303.9—281
बारां—3297—283
भरतपुर—3283.50—285
बांसवाड़ा—3256—289
जोधपुर उत्तर—3128.80—298
चित्तौड़गढ—3003.80—314
सुजानगढ़—2877.70—326
भीलवाड़ा—2874.60—328
झुंझुनूं—2818.3—335
पाली—2753.50—340
(अंक 9000 में से मिले हैं)


एक लाख से कम आबादी
डूंगरपुर—5413.8—551
नाथद्वारा—5384.5—561
नोखा—4164—1070
मांगरोल—4074.1—1121
जैसलमेर—4030.5—1146

स्वच्छता में हमारा ऐसा प्रदर्शन परेशान करने वाला है। पूर्ववर्ती सरकार में निकायों में काम नहीं हुआ। सफाई के काम ही सबलेट किए जाते रहे। इसी कारण मैंने पहली ही बैठक में सभी निकायों से सफाई से जुड़ी रिपोर्ट मांगी है। इसके आधार पर जिम्मेदारी भी तय होगी। यकीन मानिए आगामी दिनों में शहरों में स्वच्छता नजर आने लगेगी।-झाबर सिंह खर्रा, स्वायत्त शासन मंत्री

Published on:
12 Jan 2024 10:28 am
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