जयपुर

Watch: षटतिला एकादशी आज: इस वस्तु का दान करने से मिलेगा अनंत पुण्यों का फल

माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी षटतिला या पापहारिणी के नाम से जानी जाती है। यह सब पापों का नाश करने वाली है। इस दिन तिल से बने हुए व्यंजन या तिल से भरा हुआ पात्र दान करने से अंनत पुण्यों की प्राप्ति होती है।
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Feb 06, 2024
Watch: षटतिला एकादशी आज: इस वस्तु का दान करने से मिलेगा अनंत पुण्यों का फल
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जयपुर। छोटी काशी के मंदिरों में आज षटतिला एकादशी पर सुबह से ही ठाकुरजी के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। दरअसल, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी षटतिला या पापहारिणी के नाम से जानी जाती है। यह सब पापों का नाश करने वाली है। इस दिन तिल से बने हुए व्यंजन या तिल से भरा हुआ पात्र दान करने से अंनत पुण्यों की प्राप्ति होती है। षटतिला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य की आध्यात्मिक उन्नति होती है।

मंदिरों में सजी विशेष झांकियां
शहर के आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में ठाकुर राधा कृष्ण जी को लाल रंग की पोशाक धारण कराकर गोचारण लीला के विशेष स्वर्णाभूषण धारण कराए गए। ठाकुरजी को तिल के व्यंजनों का भोग लगाया गया। वहीं पुरानी बस्ती स्थित मंदिर श्री राधा गोपीनाथजी में ठाकुरजी के गोचारण लीला की झांकी के दर्शन हुए। इस मौके पर मंदिर महंत सिद्धार्थ गोस्वामी के सान्निध्य में षटतिला एकादशी हवन का आयोजन हुआ। इसमें भक्तों ने आहुतियां अर्पित कीं।

फूलों से विशेष शृंगार कर सजाई झांकी
पानों का दरीबा स्थित सरस निकुंज में राधा सरस बिहारीजी के फूलों से विशेष शृंगार कर आकर्षक झांकी सजाई गई। इस दौरान एकादशी के पदों का गायन किया गया। इसके अलावा शहर के अन्य मंदिरों में एकादशी पर विशेष आयोजन हो रहे हैं। वहीं शहर के श्याम मंदिरों में एकादशी कीर्तन हो रहा है। कांवटियों का खुर्रा स्थित प्राचीन श्याम मंदिर में बाबा का विशेष शृंगार कर एकादशी का कीर्तन किया जा रहा है। वहीं भक्त तिल के व्यंजनों का दान भी कर रहे है।

Published on:
06 Feb 2024 02:54 pm