जयपुर

कोविड के बाद दिल का हाल बेहाल, हर उम्र में फैला जाल; सामने आए हार्ट अटैक से हुई मौतों के चौंकाने वाले आंकड़े

Heart Disease: कोविड के बाद सडन कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक से हुई मौतों के चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं।
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Feb 10, 2025
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विकास जैन
जयपुर। कोविड के बाद सडन कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक से हुई मौतों के चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। जिनमें डॉक्टर और चिकित्साकर्मियों सहित हर वर्ग और कामकाज से जुड़े आमजन भी शामिल हैं। इस तरह की मौतों को अब तक कोविड से जोड़कर भी देखा जाता रहा है। लेकिन ठोस स्टडी अब तक नहीं हुई है।

इस बीच राजस्थान पत्रिका ने देश के सर्वाधिक आउटडोर मरीजों वाले अस्पतालों में शामिल सवाईमानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के कार्डियक विभाग के वर्ष 2020 से 2024 तक के आउटडोर और इनडोर मरीजों के आंकड़ों की स्क्रीनिंग की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।

5 साल में 126 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज

पांच वर्ष के दौरान अस्पताल के कार्डियक आउटडोर में 126 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। 2020 में यह आउटडोर 80354 था। जो 2024 में बढ़कर 182176 हो गया। इनडोर मरीज भी 8370 से बढ़कर 15989 दर्ज किए गए हैं।



यह तो तब, जब स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं

एसएमएस अस्पताल के कार्डियक विभाग से मिले ये आंकड़े उन मरीजों के हैं, जिन्होंने लक्षण नजर आने के बाद अस्पताल जाकर दिखाया। प्रदेश में बड़ी लाखों लोग आज भी ऐसे हैं जो सरकारी अस्पताल में नियमित स्क्रीनिंग के अभाव में अपनी नियमित कार्डियक जांचें नहीं करवा पाते। अभी हाल ही में राज्य सरकार की ओर से प्रदेशभर में एक महीने तक लगाए गए शिविरों में भी 68 हजार लोग बीपी के शिकार पाए गए थे। जिन्हें अपनी बीमारी की जानकारी ही नहीं थी।

एंजियोप्लास्टी में 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी

आउटडोर और इनडोर के साथ इस अस्पताल के कार्डियक विभाग में इलाज के हर प्रोसीजर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में इस अस्पताल में 3775 एंजियोप्लास्टी प्रोसीजर किए गए। 2024 में यह संख्या 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 5221 दर्ज की गई है। इसी तरह पेसमेकर लगाने सहित अन्य प्रोसीजर भी तेजी से बढ़े हैं।

दिल का रोग बढ़ने के कारण

1. किसी भी तरह के वायरल से खून के थक्के बनने की आशंका रहती है। कोविड भी एक तरह का वायरल संक्रमण ही था। लेकिन अभी तक किसी भी ठोस स्टडी में इसकी सीधी भूमिका प्रमाणित नहीं हो पाई है।
2. लगातार तनाव, चिंता और अवसाद हृदय के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। ये स्थितियां हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करती हैं और हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
3. लगातार काम, घर पर भी ऑफिस का काम और व्यायाम की कमी।
4. अस्वस्थ्य आहार, जंक फूड का अधिक सेवन, परंपरागत और मोटे अनाज से दूरी।
5. भारतीय आबादी हृदय रोग के लिहाज से संवेदनशील हैं, आनुवंशिक कारण भी प्रमुख हैं।
6. अब जांच की सुविधाएं बढ़ी हैं तो लोग अस्पताल तक पहुंच रहे हैं।

बड़ा कारण अव्यवस्थित जीवनशैली

दिल की बीमारियों के रोगियों की संख्या चिंताजनक गति से बढ़ रही है। इसका बड़ा कारण खराब जीवन शैली है। अस्पताल के आउटडोर में आ रहे मरीजों में करीब 50 फीसदी की उम्र 50 वर्ष से कम या इसके आस-पास है। यह सही है कि पांच वर्ष में आंकड़े तेजी से बढ़े हैं। लोगों को नियमित तौर पर अपनी कार्डियक जांचें करवानी चाहिए।
-डॉ.दीपक माहेश्वरी, कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ, प्राचार्य एवं नियंत्रक, एसएमएस मेडिकल कॉलेज

Updated on:
10 Feb 2025 07:55 am
Published on:
10 Feb 2025 07:55 am