
वॉशिंगटन. वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर प्राचीन समुद्र के सबूत मिले हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि भौगोलिक आंकड़े के आधार पर इस बात के स्पष्ट साक्ष्य पाए गए हैं कि इस ग्रह पर 3.5 अरब साल पहले एक तटरेखा थी। यह करीब 900 मीटर गहरी थी और हजारों वर्ग किलोमीटर इलाके में फैली हुई थी। इस खोज के बाद मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है।
वैज्ञानिकों ने अमरीकी भूगर्भ सर्वे (यूएसजीएस) के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर नासा के मार्स ऑर्बिटर के आंकड़े के जरिए इस समुद्र के सबूत का पता लगाया। उनका मानना है कि मंगल ग्रह पर प्राचीन काल में समुद्र का जल स्तर लगातार बढ़ा था। वहां गरम और नम मौसम पाया जाता था। यह इस समय मंगल ग्रह के कठिन माहौल और जमी हुई जमीन से अलग है। शोध के मुख्य लेखक बेंजामिन कार्डेनास ने कहा, 'विशाल समुद्र के सबूत मिलने के बाद जो सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू हमारे दिमाग में आया, वह यह था कि वहां जीवन की संभावना बहुत है।
प्राचीन जलवायु और विकास का पता चला
बेंजामिन कार्डेनास का कहना है कि यह खोज हमें प्राचीन जलवायु और उसके विकास के बारे में बताती है। इन खोज के आधार पर हम अब जानते हैं कि मंगल ग्रह का वातावरण एक काल में काफी नम था। उन्होंने कहा कि धरती पर भी हम जलधारा के इतिहास का पता तलछट को देखकर लगाते हैं, जो समय के साथ जमा होती हैं।
तटरेखा में कई नदी घाटियां
मंगल ग्रह की तटरेखा के इलाके को एइओलिस डोर्सा कहा जाता है। वहां कई नदी घाटियां हैं। नासा का पर्सिवरेंस रोवर काफी समय से मंगल ग्रह पर ब्योरे जुटा रहा है। यह वहां जीवन के संकेत ढूंढने के साथ यह जांच भी कर रहा है कि लाल ग्रह का भू-विज्ञान और इसका पुराना वातावरण कैसा रहा है।