जयपुर

चातुर्मास आत्मयात्रा, साधना और संस्कारों का महापर्व : साध्वी भव्यगुणा

Jul 28, 2026
Rajasthan

मुंबई. श्री ठाकुरद्वार जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में श्रीपती ज्वेल्स पर्ल ई-विंग स्थित आदेश्वर भवन में आयोजित चातुर्मास प्रवचनों में साध्वी भव्यगुणा और साध्वी शीतलगुणा ने चातुर्मास के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं से आत्मचिंतन, साधना और संस्कारों को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। साध्वी भव्यगुणा ने कहा कि चातुर्मास बाहरी यात्राओं का नहीं, बल्कि अंतरलोक की यात्रा का पावन अवसर है। जैन शास्त्रों में इसे ‘वर्षावास’ कहा गया है, जिसमें साधु-संत एक स्थान पर रहकर समाज को धर्म, अहिंसा और आत्मकल्याण का संदेश देते हैं।
साध्वी शीतलगुणा ने चातुर्मास की तुलना एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से करते हुए कहा कि आगम हमारा पाठ्यक्रम, जिनवाणी हमारी शिक्षा, साधु-संत हमारे गुरु, धर्मसभा हमारी कक्षा, श्रावक हमारे सहपाठी, नवतत्व हमारा पाठ, सेवा हमारी प्रायोगिक परीक्षा, आचरण हमारी वास्तविक परीक्षा, परमात्मा हमारे परीक्षक, कर्म हमारे अंक और गति हमारा परिणाम है। उन्होंने कहा कि जिनवाणी से बढक़र ज्ञान-विज्ञान का कोई विश्वविद्यालय नहीं है।
संघ अध्यक्ष हसमुख जैन ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर दादागुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वर का गुरु पूजन तथा साधना कक्ष में परमात्मा की स्थापना का मंगलमय आयोजन किया जाएगा।

Updated on:
28 Jul 2026 06:02 am
Published on:
28 Jul 2026 06:02 am