इलायची का सेवन आमतौर पर मुखशुद्धि के लिए अथवा मसाले के रूप में किया जाता है। यह दो प्रकार की आती है, हरी या छोटी इलायची तथा बड़ी इलायची। जहां बड़ी इलायची व्यंजनों को लजीज बनाने के लिए एक मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है, वहीं हरी इलायची मिठाइयों की खुशबू बढ़ाती है।
इलायची का सेवन आमतौर पर मुखशुद्धि के लिए अथवा मसाले के रूप में किया जाता है। यह दो प्रकार की आती है, हरी या छोटी इलायची तथा बड़ी इलायची। जहां बड़ी इलायची व्यंजनों को लजीज बनाने के लिए एक मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है, वहीं हरी इलायची मिठाइयों की खुशबू बढ़ाती है। मेहमानों की आवभगत में भी इलायची का इस्तेमाल होता है। त्योहारी सीजन में एक बार फिर छोटी इलायची में तेजी का रुख देखा जा रहा है। पिछले सात दिनों के दौरान छोटी इलायची के भाव 100 रुपए उछलकर 1000 रुपए प्रति किलो के आसपास पहुंच गए हैं। नीलामी केन्द्रों पर आवक घटने तथा स्टॉकिस्टों की डिमांड निकलने से छोटी इलायची में और मजबूती बताई जा रही है।
नई फसल में 15 फीसदी नुकसान
केरल और कर्नाटक सहित दक्षिण भारत के राज्यों में इस बार अच्छी बारिश हुई है। परिणामस्वरूप छोटी इलायची की नई फसल में करीब 15 फीसदी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। दीनानाथ की गली स्थित कैलाश चंद सुरेश कुमार के रामअवतार बजाज ने बताया कि ऑक्शन सेंटर्स पर तेजी आने की खबरों से उपभोक्ता मंडियों में छोटी इलायची की लिवाली बढ़ गई है। यही कारण है कि 7 एमएम छोटी इलायची के भावों में 100 रुपए प्रति किलो की और तेजी संभावित है। एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में हुई नीलामी में छोटी इलायची की आवक घटकर 54 हजार 758 किलो रहने की खबर है। छोटी इलायची की आवक तुलनात्मक रूप से नीची होने तथा डिमांड बढ़ने से इसकी औसत नीलामी कीमत उछलकर 1055.58 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। लिहाजा छोटी इलायची में आगे भी मंदी के आसार समाप्त हो गए हैं। इस बीच कंटेनर्स का अभाव बना होने तथा समुद्री ढुलाई लागत असमान होने के कारण निर्यात प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। इस बीच 8 एमएम छोटी इलायची 1500 से 1600 रुपए प्रति किलो बेची जा रही है।