
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबरों के बीच राजस्थान की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस घटनाक्रम पर जयपुर में प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। जूली ने कहा कि यह इस्तीफा बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था और सरकार को शिक्षा मंत्री से इस्तीफा मांगना चाहिए था न कि महज औपचारिक रूप से स्वीकार करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि देश भर में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में जारी अनिश्चितता को लेकर हमारे नेता राहुल गांधी ने सबसे पहले आवाज उठाई थी और 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए इस मांग को मजबूती से देश के सामने रखा था।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, ''जवाबदेही से भागने वाली मोदी सरकार के कार्यकाल में देश की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग के साथ पेपर लीक के खिलाफ राहुल गांधी एवं लाखों छात्रों के संघर्ष की आज जीत हुई है। भारी दबाव के आगे पीएम मोदी को झुकना पड़ा है और अंततः शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा है। पीएम मोदी ने उनका काफी समय तक बचाव किया लेकिन उन्हें बचा नहीं पाए।''
गहलोत ने कहा, ''आज ही मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने फिर दोहराया था कि प्रधान को बर्खास्त किया जाना चाहिए। यह इस लोकतंत्र की ताकत है कि तानाशाही करने वाली सरकार को देश की मांग के आगे झुकना पड़ा। यह इतिहास में दर्ज हो गया कि कैसे छात्रों पर पैलेट गन चलाने जैसी बर्बरता हुई और छात्रों की आवाज बुलंद करने वाले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कैसे घसीटा गया।''
पूर्व सीएम ने कहा, ''आज लोकतंत्र की जीत हुई और तानाशाही की हार हुई है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली इस अंधी-बहरी सरकार को जनता माफ नहीं करेगी और हमारा यह संघर्ष छात्रों को न्याय मिलने तक जारी रहेगा।''
राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "युवाओं ने मोदी जी के अहंकार को तोड़ के दिखाया है। ये लड़ाई यहीं खत्म नहीं होती है। जैसा राहुल गांधी कहते हैं ये लड़ाई देश की शिक्षा व्यवस्था को बदलने की है और ये लड़ाई जारी रहेगी।"
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने छात्रों के आंदोलन और विपक्ष की भूमिका को रेखांकित करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। जूली ने कहा, "मैं कहना चाहता हूं कि देर आए दुरुस्त आए। इस्तीफा तो बहुत पहले हो जाना चाहिए था। इस्तीफा देने की जगह इनसे (धर्मेंद्र प्रधान) इस्तीफा लिया जाना चाहिए था।"
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर एकत्र हुए छात्रों की चिंताओं को समझते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूरे देश में 'छात्रों की गूंज' अभियान चलाया था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की सबसे पहली और मुखर मांग राहुल गांधी द्वारा ही की गई थी।
टीकाराम जूली ने केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए आरोपों पर भी कड़ा एतराज जताया। जूली ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने छात्र आंदोलन और जनविरोध को दबाने के लिए इसे 'विदेशी फंडिंग' का रंग देने की कोशिश की। सरकार ने यह दिखाने का प्रयास किया कि चीन, नेपाल या पाकिस्तान के खातों से समर्थन मिल रहा है, जो कि पूरी तरह भ्रामक था।
उन्होंने कहा कि पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जिस कपटपूर्ण और अलोकतांत्रिक तरीके से हिरासत में लिया गया/ले जाया गया, वह अत्यंत निंदनीय है।
अपने वक्तव्य के समापन में नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह देश के भविष्य और युवाओं के साथ हुए पूरे प्रकरण पर अपना रुख साफ करे। जूली ने कहा कि इन सभी घटनाक्रमों के बाद सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों और युवाओं के प्रति उसका दृष्टिकोण क्या है। राजस्थान के लाखों छात्र-छात्राएं जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके साथ हुए इस खिलवाड़ और आंदोलन के दौरान हुए व्यवहार पर सरकार को सामने आकर जवाब देना चाहिए।