Operation Sindoor: भारत-पाक तनाव ने जहां एक ओर पर्यटकों को असमंजस में डाला है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक पर्यटन को अप्रत्याशित बढ़ावा दिया है। गर्मी की छुट्टियों में राजस्थान के पर्यटकों का ये ट्रेंड न सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से नई दिशा दे रहा है, बल्कि पर्यटन के धार्मिक आयाम को भी मजबूत कर रहा है।
India Pak Tension: जयपुर। भारत-पाक तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद राजस्थान में ट्रैवल पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हर साल गर्मियों में शिमला, मनाली और कश्मीर की वादियों की ओर रुख करने वाले जयपुरवासियों का झुकाव अब धार्मिक स्थलों की ओर होता दिख रहा है। सुरक्षा चिंताओं और सीमा पर बढ़ते तनाव के चलते इस बार अधिकांश लोगों ने पहाड़ी इलाकों की योजना रद्द कर दी है।
एमआई रोड और टोंक रोड स्थित टूर ऑपरेटरों के अनुसार, कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड की करीब 70-80 फीसदी बुकिंग्स रद्द हो चुकी हैं। इनकी जगह मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, उज्जैन, वाराणसी और हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों के लिए बुकिंग्स में 70 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
गर्मियों की छुट्टियों में परंपरागत सैर-सपाटे की जगह अब श्रद्धा और अध्यात्म ने ले ली है। टूर कंपनियां दो से तीन जगहों के लिए प्रति व्यक्ति ₹5000-₹7000 में आकर्षक धार्मिक पैकेज पेश कर रही हैं, जो परिवारों को खासे लुभा रहे हैं। खासतौर पर मई के आखिरी सप्ताह से जून के पहले हफ्ते तक अयोध्या, चारधाम और वाराणसी के लिए सबसे अधिक बुकिंग दर्ज की गई है।
विदेश यात्रा भी इस बार हाशिये पर जाती दिख रही है। थाइलैंड, सिंगापुर जैसे देशों के लिए बुकिंग्स में 20-25% की गिरावट आई है। वहीं विदेशी पर्यटक भी भारत आने को लेकर असमंजस में हैं।
फेडरेशन ऑफ राजस्थान होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र लूनीवाल का कहना है कि मौजूदा हालात में लोग ऐसी जगहों पर जाना पसंद कर रहे हैं जहां भीड़ कम हो और सुरक्षा का भरोसा हो। इसीलिए धार्मिक स्थल सबसे सुरक्षित और मानसिक शांति देने वाले विकल्प बनकर उभरे हैं।
पर्यटन प्रेमी प्रदीप शर्मा का कहना है कि "शिमला-मनाली की योजना को रद्द कर हमने वृंदावन और उज्जैन जाने का मन बनाया है।" वहीं ज्योति कंवर ने बताया कि "अब चारधाम यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं, जहां सुकून के साथ श्रद्धा भी जुड़ी है।"