जयपुर

लड़के की शादी में दहेज ना लेकर किया ये काम, तो इस अनूठे पहल में ग्रामीणों ने भी दिया अपना साथ

करणसर के नजदीक बासड़ी खुर्द गांव में एक सोनी परिवार रहता है। और हाल ही इनके दो लड़कों की शादी में इनके द्वारा दहेज ना लेकर किया ये काम...
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Updated: 27 Nov 2017, 5:53 PM IST
Uniqe marriage in Rajasthan

करणसर। दहेज हत्या के मामले अक्सर देखने सुनने को मिलते हैं, जहां दहेज के लालची अपनी किसी भी हद को पार करने से भी नहीं कतराते हैं तो वहीं समाज में ऐसे लोग अब भी इस प्रथा को बढ़ावा देने का काम करते दिख भी जाते हैं। लेकिन यहां करणसर कस्बे के नजदीक रहने वाले सोनी परिवार ने दहेज नहीं लेकर इन जैसे लोगों को ना केवल संदेश भी दिया, बल्कि उनके द्वारा किए काम अब लोगों के लिए मिसाल बनकर उभरी है। जिसकी तारीफ इलाके के लोग करते नहीं थक रहे हैं।

दरअसल, पूरा मामला शादी और दहेज से जुड़ा है। यहां करणसर के नजदीक बासड़ी खुर्द गांव में एक सोनी परिवार रहता है। और हाल ही इनके दो लड़कों की शादी में इनके द्वारा दहेज ना लेकर गोशालाओं में चारा की गाड़ी भेंट करने पर मामला कौतूहल का विशष तो बना ही है, साथ ही उनके इस पहल पर शुक्रवार को ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने इस अनूठी पहल पर गर्मजोशी के साथ स्वागत भी किया।

दोनों बेटों की शादी में नहीं लिया दहेज-

जानकारी के अनुसार बासड़ी खुर्द गांव निवासी हरिशंकर सोनी के एक पुत्र राजेन्द्र की शादी नागौर जिले के लादरिया गांव के चैनसुख सोनी की पुत्री संगीता के साथ बीते 19 नवम्बर को हुई है। इसके साथ ही हरिशंकर सोनी के दुसरे पुत्र विकास की शादी हिंगोनिया निवासी मातादीन सोनी की पुत्री दिव्या के साथ बीते 23 नवम्बर को हुई है। हरिशंकर सोनी ने दोनों लडकों की शादी में अनूठी मिशाल कायम करते हुए लग्न टीका, बाटका आदि में मात्र एक-एक रूपए लड़की पक्ष से शगुन के नाम पर लिया है। और इसे ही दहेज ही रस्म के तौर रखा। और इसके अलावा उन्होंने दहेज नहीं लिया है।

गौशाला में भिजवाया चारा-

इतना ही नहीं दोनों बेटों की शादी के अवसर पर हरिशंकर सोनी की ओर दो पिकअप गाड़ी बासडी खुर्द गौशाला में, लड़की के पिता चैनसुख सोनी की ओर से दो गाड़ी पिकअप चारा की रलावता गौशाला में और हिंगोनियां मातादीन सोनी की ओर से एक पिकअप गाड़ी चारा की डूंगरी कलां जयरामपुरी बाबा गोशाला में भेंट की गई। तो वहीं इसके पीछे उनका मानना है कि इससे हदेज प्रथा पर रोक के साथ ही गोसेवा को बढावा मिल सकेगा। जो कि सच में समाज में मिसाल के तौर पर ली जाएगी।

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