जयपुर

‘लोकरंग’ के मंच पर लोक-संस्कृति के विविध रूप साकार

जवाहर कला केन्द्र की ओर से आयोजित 27वें लोकरंग महोत्सव के तीसरे दिन मुक्ताकाशी मंच पर लोक कला का संगम हुआ।

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Oct 21, 2024
जेकेके में लोकनृत्यों की प्रस्तुति देते लोक कलाकार

जयपुर। जवाहर कला केन्द्र की ओर से आयोजित 27वें लोकरंग महोत्सव के तीसरे दिन मुक्ताकाशी मंच पर लोक कला का संगम हुआ। महोत्सव के तहत विभिन्न प्रांतों के कलाकारों ने लोक-कलाओं की छटा बिखेरी। इस बीच राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और दस्तकारों के उत्पाद खरीदते नजर आए। यहां मुख्य मंच पर कुचामणी ख्याल, लोक गायन, भपंग, कथौड़ी नृत्य, भवाई, चरी, कालबेलिया, तेरहताली की प्रस्तुति हुई।

लोक गायन सभा में माधवी मेवाल का लोक गायन और बाड़मेर के फकीरा खान भादरेश की मांगणियार गायन की प्रस्तुति हुई। मध्यवर्ती के मंच पर राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, गोवा, ओडिशा व उत्तर प्रदेश की लोक कलाएं साकार हुई।

मध्यवर्ती में 'मुजरो मान ली जो सा' और 'घोड़लियो' गीत के साथ जैसलमेर से आए मांगणियार बच्चों ने प्रस्तुति की शुरुआत की। सिर पर कलश रखकर बिहार के कलाकारों ने झिझिया नृत्य की प्रस्तुति दी। मध्य प्रदेश के कलाकारों ने करमा नृत्य की प्रस्तुति दी। हिलजात्रा नृत्य की प्रस्तुति से कलाकारों ने दर्शकों को उत्तराखंड की सैर कराई।

जम्मू-कश्मीर के कलाकारों ने सुरमा नृत्य की प्रस्तुति दी। शृंगार प्रधान नृत्य में नायिका अपने प्रियतम से घर आने की गुहार लगाती है। गोवा के कलाकारों ने समई नृत्य की प्रस्तुति दी। उत्तरखंड के जनजातीय कलाकारों ने जौनसारी नृत्य पेश किया। ओडिशा के कलाकारों ने डालखाई नृत्य पेश किया।

उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने मयूर नृत्य की प्रस्तुति से माहौल को कृष्णमय कर दिया। शिल्पग्राम के मुख्य द्वार के सामने लॉन में सजी रंग चौपाल पर उदयपुर के कलाकारों ने गवरी लोकनाट्य खेला। सोमवार को शाम 4 बजे से चौपाल में लोक नाटक की प्रस्तुति होगी।

Published on:
21 Oct 2024 10:59 am
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