
जयपुर। सावन का महीना बारिश की बौछारों के साथ प्रदेश में दस्तक दे चुका है। चारों ओर हर फिजां बारिश की बूंदो में घुली है। प्रकृति ने हरियाली की चादर ओढ़ ली है। इसके चलते महिलाओं के लिए लहरिया ओढ़नी का इंतजार खत्म हो चुका है। सावन का महीना शुक्रवार से शुरू हो जाएगा। इसके बाद महिलाओं के सिर पर लहरिया नजर आएगा, जहां सावन-भादवे के महीने में त्यौंहारों की भरमार होती है। इनमें युवतियां व महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है। महिलाएं सज-धज कर बारिश का लुत्फ उठाते पिकनिक स्पॉट्स पर परिजनों संग पहुंचती है।
कपड़ा बाजार में आई रौनक
सावन के उत्सवों पर प्रदेश की अधिकांश महिलाएं लहरिया की पोशाकें पहनती है। इस लिहाज से सावन माह में शहर के कपड़ा बाजार में रौनक देखने को मिल रही है। महिलाएं सावन में लहरिया की खरीद को शुभ मानती हैं। दरअसल, लहरिया राजस्थानी पोशाकों में काफी खास है, जो सावन-भादवे के महीने में अधिकतर महिलाएं धारण करती है। जैसे ही सावन का महीना शुरू होता है वहीं से कपड़ा बाजार में रौनक आ जाती है। इन दिनों में लहरिया की बिक्री आम दिनों के मुकाबले दो से तीन गुना अधिक रहती है।
सावन के महीने में लहरिया बना पहली पसंद
शहर के कपड़ा बाजारों लहरिया की दुकानें सज गई हैं। कपड़ा दुकानदारों का कहना है कि सावन के महीने में लहरिये की ज्यादा बिक्री होती है। जयपुर, जोधपुर, कोटा और सूरत का लहरिया महिलाओं की पहली पसंद बना हुआ है। दरअसल, पिछले साल जीएसटी की वजह से कपड़ा बाजार में कई दिनों तक हड़ताल रहने से लहरिया कारोबार नहीं हो पाया था। लेकिन इस साल कपड़ा बाजार में अच्छी रौनक देखने को मिल रही है। जयपुर के लहरिया की डिमांड सबसे ज्यादा मेड़ता क्षेत्र सहित समूचे जिले में जयपुर के लहरिया की डिमांड सबसे अधिक रहती है। मानसून के दिनों में युवतियां और महिलाएं वन सोमवार के व्रत करने के लिए पिकनिक स्थलों की तरफ रुख करेंगी। तीज के त्योहार पर सगाई के बाद युवतियों के लिए ससुराल पक्ष की ओर से लहरिया भिजवाने की रश्म भी अदा की जाती है।