जयपुर

मौसम का ‘मूड स्विंग’…बाल-इम्युनिटी को जिद्दी वायरस ने घेरा…बार बार बीमार हो रहे बच्चे, यूं बरते सावधानी

जेके लोन में रोज 100–150 भर्ती; कई गंभीर केस, एक बेड पर दो बच्चों तक रखने की नौबत

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Dec 16, 2025
जेके लोन हॉस्पिटल (फाइल फोटो: पत्रिका)

जयपुर. बढ़ते प्रदूषण और तापमान के उतार-चढ़ाव और लंबे समय तक एक्टिव रहने वाले वायरस ने इस बार बच्चों की सेहत पर जोरदार चोट की है। जयपुर के अस्पतालों में बीमार बच्चों बढ़ती भीड़ बता रही है कि यह मौसम नन्हों के लिए कितना भारी पड़ रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञों का तर्क है कि अमूमन दिसम्बर माह में मरीजों की संख्या घट जाती है, लेकिन इस बार यह 20 फीसदी तक ज्यादा है। पूरी तरह से स्वस्थ होने में भी लंबा समय लग रहा है।

इसकी वजह वायरस के ज्यादा देर तक एक्टिव रहना भी बताया जा रहा है। हेल्दी सीजन में अनहैल्दी हो रहे नौनिहाल वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक गुप्ता का कहना है कि इस बार दिसम्बर पूरी तरह से हेल्दी महीना साबित नहीं हुआ है। तापमान में उतार-चढ़ाव है, प्रदूषण भी अधिक है। इससे बच्चों की इम्युनिटी कमजोर पड़ रही है और वे बार-बार बीमार हो रहे हैं।

जेके लोन में आईसीयू फुल, वार्ड में भी बेड की कमी

इधर, जेके लोन अस्पताल में भी हेल्दी सीजन में ओपीडी एक हजार पार चल रही है। वहीं, रोजाना 100 से 150 मरीज भर्ती हो रहे हैं। कई मरीज गंभीर हालत में भी पहुंच रहे हैं। आइसीयू और वार्डों में बेड फुल हैं। कई बार एक बेड पर दो-दो बच्चों को भी रखना पड़ रहा है।

अस्पताल के उप-अधीक्षक डॉ. के.के. यादव ने बताया कि मरीजों में सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी की समस्या देखी जा रही है। कई केस में डेंगू जैसे लक्षण भी मिल रहे हैं। उनमें अचानक प्लेटलेट्स की कमी भी देखी जा रही है। जैसे जैसे सर्दी ज्यादा बढ़ेगी तो, मरीजों की संख्या घटेगी।

इन बीमारियों ने घेरा

एलर्जी कुकुर खांसी सांस लेने में तकलीफ उल्टी-दस्त निमोनिया जैसे लक्षण

यूं बचाएं संक्रमण से

विशेषज्ञों के अनुसार वायरल संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई अत्यंत ध्यान रखें।बच्चों के हाथ दिन में कई बार धुलवाएं।भीड़भाड़ वाली जगहों पर बच्चों को लेकर जाने से बचें। यदि घर में किसी को सर्दी-खांसी है तो बच्चे से थोड़ी दूरी रखें।बच्चे को लगातार खांसी, तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत या सीने में घरघराहट की शिकायत हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।देरी करने पर मामला निमोनिया तक पहुंच सकता है,जो सर्दियों में बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

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