
सुभाष राज
जयपुर/नई दिल्ली। तीन राज्यों के चुनावों के बाद फिर से उठ खड़ी हुई कांग्रेस को जनवरी में कार्यसमिति की बैठक से पहले नया संगठन महासचिव मिल जाएगा। पार्टी इसके लिए चेहरा तलाश रही है। इधर राजस्थान के मुख्यमंत्री चुन लिए गए अशोक गहलोत ने भी शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के बाद संगठन महासचिव के कार्यालय में बैठकर सहयोगियों से हल्के-फुल्के अंदाज में विदाई ली।
कांग्रेस में अध्यक्ष के बाद संगठन महासचिव पद नम्बर दो माना जाता है, इसे अब तक कभी खाली नहीं रखा गया। हालांकि जनार्दन द्विवेदी के बाद संगठन महासचिव का पद संभाले गहलोत को एक साल भी नहीं हुआ लेकिन राजस्थान में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद आलाकमान ने उन्हें 25 लोकसभा सीटों वाले राज्य की कमान सौंप कर लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को सफलता दिलाने का भार सौंपा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार गहलोत के मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद से ही आलाकमान ने नए महासचिव के चेहरे की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक फैसला नहीं कर पाया है। कांग्रेस के स्थापना दिवस पर हुए समारोह में मुख्यालय आए राहुल गांधी की अगवानी के बाद गहलोत उनसे मिले और नए संगठन महासचिव पद के लिए सामने आए नामों पर चर्चा की। माना जा रहा है कि इसी दौरान गहलोत ने संगठन महासचिव पद छोडऩे के लिए कांग्रेस अध्यक्ष की मंजूरी भी ली। बाद में अपने कार्यालय में बैठकर उन्होंने वहां मौजूद पत्रकारों तथा कार्यालय स्टाफ से भी मजाकिया लहजे में बात करते हुए विदाई ली।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि आलाकमान ने नए संगठन महासचिव पद के लिए कुछ नामों पर विचार किया है। इनमें सबसे ऊपर मौजूदा महासचिव मुकुल वासनिक का नाम है। हालांकि कुछ और नाम भी सामने आए हैं, लेकिन इस पद के लिए जिस लचीले रुख की जरूरत होती है, उसमें वासनिक को उपयुक्त माना गया है। यद्यपि संगठन महासचिव के लिए गुलाम नबी आजाद समेत आधा दर्जन अन्य नाम भी हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि अशोक गहलोत के संगठन महासचिव बनने के बाद पार्टी ने कर्नाटक में भाजपा के जबड़े से सत्ता छीनने के साथ ही हिन्दी बैल्ट के तीन राज्यों में भी भाजपा को बेदखल कर सत्ता पर काबिज होने में सफलता हासिल की है।