जैक ने सोचा भी नहीं था कि उसके बनाए पोस्टर को देखकर खिलौना ढूंढने में लोग इतनी दिलचस्पी लेंगे। जैक और उसकी मां ने खिलौने की जानकारी देने वाले और उसकी पोस्ट पर ढेरों प्रतिक्रिया भेजने वालों का शुक्रिया अदा किया।
वाशिंगटन. इंग्लैंड में कुंब्रिया के उल्वरस्टन के 10 वर्षीय जैक स्टील की कहानी जितनी दिलचस्प है, उतनी ही भाव विभोर करने वाली। जैक ने अपने खोए हुए खिलौने का एक पोस्टर बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। इसके बाद लोगों ने अपने स्तर पर इसे तलाशना शुरू कर दिया और आखिर उसे खिलौना मिल गया।
दरअसल, गर्मियों की छुट्टी में जैक मैनेचेस्टर में लेगोलैंड डिस्कवरी सेंटर घूमने गया था। इस दौरान उसने खुद जैसा दिखने वाला एक लेगो टॉय बनाया, जिसका नाम भी ‘मिनी जैक’ रखा। दुर्भाग्य से 14 सितंबर को स्कूल जाते वक्त उसके बैग से निकलकर कहीं गिर गया। जब उसे पता चला तो वह काफी उदास हो गया। उसको समझ नहीं आ रहा था कि 11 हजार की आबादी वाले उल्वरस्टन में अपने प्रिय खिलौने को कैसे ढूंढे। तब उसे युक्ति सूझी और खिलौने का पोस्टर बनाया, जिस पर लिखा, खो गया! क्या किसी ने इस लेगो टॉय को देखा है? पते के साथ ही जैक ने लिखा, टॉय लाने वाले को दो ब्रिटिश पाउंड का इनाम दिया जाएगा। जैक ने भी अपनी दादी के साथ खिलौने को ढूंढने का प्रयास किया, लेकिन नहीं मिला। सोशल मीडिया पर मैसेज देखकर लोगों ने तरह-तरह की भावपूर्ण प्रतिक्रिया दी और संवेदना जताई।
और मैसेज पढकऱ जैक उछल पड़ा
एक दिन किसी महिला का मैसेज पढकऱ वह खुशी से उछल पड़ा। यह उसके खोए हुए खिलौने को लेकर था। दरअसल खिलौना जैक के स्कूल में पढऩे वाली एक बच्ची को मिला था। उसने अपनी मां को दे दिया। बच्ची की मां ने जब फेसबुक पोस्ट देखी तो उन्होंने खिलौने के बारे में जैक की मां लोना वॉकर को संदेश भेजा। इसमें उन्होंने लिखा, उनके पास वैसा ही एक खिलौना है, जैसा जैक ने पोस्टर में लिखा है।
सोचा नहीं था, ऐसे मिलेगा
जैक ने सोचा भी नहीं था कि उसके बनाए पोस्टर को देखकर खिलौना ढूंढने में लोग इतनी दिलचस्पी लेंगे। जैक और उसकी मां ने खिलौने की जानकारी देने वाले और उसकी पोस्ट पर ढेरों प्रतिक्रिया भेजने वालों का शुक्रिया अदा किया। उसने 2 पाउंड का इनाम देने की बजाय खिलौना बताने बच्ची और उसकी मां को चॉकलेट का डिब्बा भेंट किया और ‘मिनी जैक’ अपनी एक खिलौना कार में बिठाकर मां के साथ घर चल दिया। यह खबर बाद में अल्वरस्टन के स्थानीय अखबार ‘द मेल’ में प्रकाशित हुई।