जयपुर

चीन ने कैसे लगा दिया अड़ंगा: वसुंधरा राजे सरकार क्यों नहीं दिखा पाएगी इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी, जानिए

— चीन की कंपनियों के कारण अटकी है जयपुर में इलेक्ट्रिक बसें
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Sep 18, 2018
Electric bus
Electric bus

जयपुर। राज्य की मौजूदा वसुंधरा राजे सरकार तमाम कोशिशों के बावजूद जयपुर में इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी नहीं दिखा पाएगी। इसका कारण है चीन का अड़ंगा। जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (जेसीटीएसएल) ने जयपुर में इलेक्ट्रिक बसें चलाने का जिम्मा टाटा कंपनी को दिया है। लेेकिन तकनीकी बिड में अयोग्य घोषित होने के बाद अब चीन की कंपनियों ने जेसीटीएसएल के साथ टाटा के एलओयू हस्ताक्षर करने को हाइकोर्ट में चुनौती दे रखी है। मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण जेसीटीएसएल स्मार्ट इलेक्ट्रिक बसों को नहीं चला पा रहा है। इलेक्ट्रिक बसों के उद्घाटन के लिए पहले 15 अगस्त 2018 की डैडलाइन तय की गई थी।

कम कीमत पर टाटा जीता, चीनी कंपनियां गई कोर्ट
जानकारी के अनुसार जेसीटीएसएल ने 40 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे। चाइना की माइत्रा फोर एनर्जी और गोल्ड स्टोन कंपनियों ने जेसीटीएसएल को प्रस्ताव दिए। इनके अलावा भारतीय कंपनियों में अशोक लीलेंड और टाटा ने प्रपोजल दिए। चाइनीज कंपनियों ने एक इलेक्ट्रिक बस की कीमत 1.50 करोड़ से 1.82 करोड़ रूपए बताई। वहीं, अशोक लीलेंड ने भी एक बस 1.50 करोड़ रूपए में उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव दिया। जबकि सबसे कम टाटा ने 75 लाख रूपए में बस मुहैया करवाने का प्रस्ताव दिया। सबसे कम कीमत के कारण जेसीटीएसएल ने टाटा के साथ करार कर लिया। ज्यादा कीमत और अन्य तकनीकी कारणों के चलते चाइनीज कंपनियां टेक्निकल बिड के स्तर पर ही बाहर हो गई। टेंडर नहीं मिलने से हताश चाइनीज कंपनियों ने जेसीटीएसएल के फैसले को कोर्ट में चुनौती दे दी।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत आनी है इलेक्ट्रिक बसें
जयपुर में इलेक्ट्रिक बसें चलाने का प्रोजेक्ट एशिया विकास बैंक (एडीबी) वित्त पोषित है। प्रोजेक्ट में एक इलेक्ट्रिक बस खरीदने के लिए 75 लाख रूपए की ही राशि स्वीकृत हुई है। इसके चलते जेसीटीएसएल ने भी टाटा कंपनी के 75 लाख रूपए वाले प्रस्ताव को स्वीकार किया था। टाटा जो बस मुहैया करवाएगी वो 35 सीटर इलेक्ट्रिक बस एक बार में एसी के साथ 100 किलोमीटर चलेगी। बस रिचार्ज होने में 5—6 घंटे का वक्त लगेगा। बस अधिकतम 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगी। इस इलेक्ट्रिक बस का ट्रायल हिमाचल के परवानू से शिमला के बीच हुआ। जिसमें बस ने 160 किलोमीटर की दूरी सफलतापूवर्क पूरी कर ली थी। वहीं, चाइनीज कंपनी गोल्ड स्टोन ने डेढ़ करोड़ रूपए में जो बस मुहैया करवाने का प्रस्ताव दिया था, वो 26 सीटर इलेक्ट्रिक बस एक बार चार्ज करने पर 200 किमी चलती है। इसे रिचार्ज करने में 4 घंटे का समय लगता है। वहीं, लीलेंड की 35 से 65 सीटर बस एक बार चार्ज करने पर 120 किमी चलेगी। इसकी कीमत 1.50 करोड़ से 3.50 करोड़ रूपए तक है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार —
इलेक्ट्रिक बस प्रोजेक्ट को चाइनीज कंपनियों ने कोर्ट में चुनौती दे रखी है। चीन की कंपनियां तकनीकी बिड में अयोग्य घोषित हो गई। अब न्यायालय में फैसला होने के बाद ही इलेक्ट्रिक बसें लाने की स्थिति के बारे में पता चल पाएगा।
हरीश गोस्वामी, जनरल मैनेजर, जेसीटीएसएल

Published on:
18 Sept 2018 09:12 am
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