रेगिस्तान की तपती रेत में अब रिश्तों की मिठास चॉकलेट के ज़रिए महसूस की जा रही है। यहां पारंपरिक जीवनशैली और संस्कृति की गूंज हर नुक्कड़ पर सुनाई देती है, वहीं अब यहां के युवा भी बदलते समय के साथ कदम मिलाते दिखाई दे रहे हैं।
रेगिस्तान की तपती रेत में अब रिश्तों की मिठास चॉकलेट के ज़रिए महसूस की जा रही है। यहां पारंपरिक जीवनशैली और संस्कृति की गूंज हर नुक्कड़ पर सुनाई देती है, वहीं अब यहां के युवा भी बदलते समय के साथ कदम मिलाते दिखाई दे रहे हैं। रविवार को मनाए गए वल्र्ड चॉकलेट डे पर बाजारों में चॉकलेट के दिल शेप केक, ट्रफल्स, विदेशी ब्रांड्स और विशेष पैकिंग वाले गिफ्ट बॉक्स की जबरदस्त मांग देखी गई। शहर की बेकरीज़ व गिफ्ट शॉप्स में ग्राहकों की भीड़ लगी रही। दुकानदारों ने इस मौके के लिए खास रेगिस्तानी रंगों में पैकिंग तैयार की थी, जिनमें लाल-पीला और मटमैला रंग प्रमुख रहे।
केवल शहर ही नहीं अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवा अब दोस्ती और भावनाएं जताने के लिए चॉकलेट का सहारा ले रहे हैं। 12वीं कक्षा की विद्यार्थी मानवी वैष्णव ने बताया कि इस बार मैंने अपनी बेस्ट फ्रेंड को चॉकलेट दी। अब चॉकलेट हर रिश्ते में मिठास घोलने का मौका प्रदान करता है। रामगढ़ निवासी विवेक कुमार के अनुसार गांव में पहले कोई चॉकलेट डे नहीं मनाता था, लेकिन अब हम दोस्ती जताने के लिए चॉकलेट गिफ्ट करने लगे हैं। अच्छा लगता है। फैशन डिजाइनिंग छात्रा सना खत्री का कहना है कि अब जैसलमेर के युवा भी ट्रेंड अपनाने लगे हैं, वो भी अपनी संस्कृति को ध्यान में रखते हुए। कॉलेज छात्र आरव राजपुरोहित के अनुसार मैंने मम्मी-पापा को चॉकलेट दी। वो खुश हुए तो लगा कि चॉकलेट सिर्फ स्वाद नहीं, प्यार जताने का तरीका भी है।
उद्यमी विनय व्यास का कहना है कि जैसलमेर में युवाओं के सोचने और इजहार करने के तरीके में बदलाव आया है। यदि कोई आधुनिक ट्रेंड मर्यादा और सम्मान के साथ अपनाया जाता है, तो वह समाज में सकारात्मक भावनाएं बढ़ा सकता है। जैसलमेर जैसे पारंपरिक क्षेत्र में चॉकलेट कल्चर का आना इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी भावना के साथ मिठास जोडऩा चाहती है, बिना अपनी जड़ों से कटे।