दारुल उलूम कादरिया फैज़-ए-सिकंदरिया में सोमवार को सालाना जलसा-ए-मुबारक का आयोजन किया गया। जलसे में शिक्षा, कौमी एकता, सामाजिक समरसता एवं आपसी भाईचारे पर विशेष रूप से ज़ोर दिया गया।
दारुल उलूम कादरिया फैज़-ए-सिकंदरिया में सोमवार को सालाना जलसा-ए-मुबारक का आयोजन किया गया। जलसे में शिक्षा, कौमी एकता, सामाजिक समरसता एवं आपसी भाईचारे पर विशेष रूप से ज़ोर दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री शाले मोहम्मद ने कहा कि शिक्षा ही समाज की तरक्की का सबसे मज़बूत माध्यम है और इससे ही नई पीढ़ी को सही दिशा मिलती है।
उन्होंने सभी वर्गों को मिल-जुलकर प्रेम, सौहार्द और भाईचारे के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसे धार्मिक व शैक्षणिक आयोजन समाज में आपसी सद्भाव, अमन और एकता को मज़बूत करते हैं। उन्होंने कहा कि देश की असली ताकत उसकी विविधता और आपसी भाईचारा है। मदरसा प्रबंधन की ओर से सैयद अमीनुल कादरी एवं मुफ़्ती शेर मोहम्मद ने भी अपने विचार रखते हुए शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। जलसे में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, समाजसेवी, बुद्धिजीवी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारे एवं खुशहाली की दुआ की गई।