
जैसलमेर. जिले में नगरीय निकाय चुनावों का बिगुल बजते ही जिले की राजनीति भी गरमा गई है। आचार संहिता लागू होते ही प्रशासनिक तैयारियां तेज हो चुकी हैं और प्रमुख राजनीतिक दल अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। हालांकि, इस बार निकाय चुनाव में जेन जी इफेक्ट साफ-साफ नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का चुनाव सिर्फ जातिगत समीकरणों या पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे नहीं जीता जा सकेगा। इस बार शहरी सत्ता की चाबी ‘जेन जी’ यानी युवा मतदाताओं के हाथों में होगी। इसलिए अब दोनों प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा जेन जी को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाने में जुटे हैं।
चाहे भारतीय जनता पार्टी हो, कांग्रेस या फिर निर्दलीय व क्षेत्रीय दल, सभी ने यह भांप लिया है कि युवा अब सिर्फ खोखले दावों से गुमराह होने वाले नहीं हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दल अपने वार्ड प्रत्याशियों के चयन से लेकर चुनावी मुद्दों के निर्धारण में युवाओं के मूड का फीडबैक ले रहे हैं।
पत्रिका ने जब शहर के ऐसे जेन जी मतदाताओं से बात की तो उन्हाेंने कहा कि इस वे अपने प्रत्याशी में वे खूबियां देखना चाहते हैं तो उनकी समस्याओं को सुने, उन्हें हल करने की क्षमता रखता हो। जरूरी नहीं कि हमारा मुद्दा केवल पढ़ाई से जुड़ा हो, मोहल्ले और वार्ड की कई ऐसी परेशानियां हैं, जिनसे हमें भी जूझना पड़ता है।
हाल ही में दिल्ली और झारखंड में देखने को मिले युवाओं व छात्रों के आंदोलनों का असरसीमावर्ती जिलों तक पहुंच गया है। इन आंदोलनों में युवाओं की एकजुटता और मुद्दों पर अडिग रहने की शैली ने राजनीतिक दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। कॉलेज कैम्पस में भी इन दिनों युवाओं के बीच निकाय चुनाव को लेकर चर्चा मुखर है।
मांगने लगे जवाब
हर वार्ड में युवाओं के अनौपचारिक समूह और डिजिटल नेटवर्क सक्रिय हो चुके हैं। युवा मतदाता इस बार सिर्फ वोटर बनकर रहने के बजाय सवालिया लहजे में मैदान में खड़े हैं। स्थानीय युवाओं का कहना है कि जब प्रत्याशी उनके दरवाजों पर वोट मांगने आएंगे, तो उनसे पुराने वादों और वार्ड की मूलभूत समस्याओं पर सीधा हिसाब मांगा जाएगा।
- रोजगार और कौशल केंद्र: लोकल लेवल पर युवाओं के लिए डिजिटल लाइब्रेरी, स्किल सेंटर और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के अवसर।
- डिजिटल और स्मार्ट बुनियादी ढांचा: हर वार्ड में सुरक्षित वाई-फाई जोन, ऑनलाइन नागरिक सेवाएं और शिकायत निवारण का त्वरित डिजिटल तंत्र।
- पर्यावरण और स्वच्छ शहर: कचरा प्रबंधन की वैज्ञानिक प्रणाली, हरियाली और युवाओं के लिए सुरक्षित खेल मैदान।
- पारदर्शिता और सीधी जवाबदेही: पार्षद चुनाव जीतने के बाद नियमित रूप से वार्ड सभाएं आयोजित करें और विकास बजट का हिसाब दें।
पहली बार वोट डालने को लेकर काफी उत्साहित हूं। अब तक चुनावों को सिर्फ परिवार और आसपास के लोगों से चर्चा करते सुना था, लेकिन इस बार खुद मतदान केंद्र जाकर अपने मत का इस्तेमाल करूंगा। मेरा मानना है कि युवा अपने अधिकार को समझें और बिना किसी दबाव के सही प्रतिनिधि चुनें।
कृष्णमय, युवा मतदाता
पहली बार मतदान करना मेरे लिए खास अनुभव होगा। मैं चाहता हूं कि हमारा शहर बेहतर सुविधाओं, साफ-सफाई, अच्छी सड़कों और रोजगार के अवसरों की दिशा में आगे बढ़े। इस बार उम्मीदवारों के वादों के साथ उनके काम और सोच को भी समझकर मतदान करूंगा। लोकतंत्र में मेरी पहली भागीदारी जिम्मेदारी के साथ होगी।
देवांग थानवी, युवा मतदाता