
ललिता छंगाणी
जैसलमेर. परिस्थितियां हमेशा अनुकूल हों, यह जरूरी नहीं, लेकिन मुश्किलों के बीच रास्ता बनाना ही असली सफलता है। जैसलमेर की ललिता छंगाणी की जिंदगी इसी जज्बे की मिसाल है। 16 दिसंबर 1983 को जन्मीं ललिता को महज तीन वर्ष की उम्र में पोलियो हो गया। बचपन में ही चलना-फिरना मुश्किल हुआ, लेकिन माता-पिता ने उन्हें हिम्मत नहीं हारने दी। पिता स्वर्गीय रामगोपाल छंगाणी और माता कमला देवी ने उपचार के साथ हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उनके संघर्ष में साथ दिया।
स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के कारण उनकी पढ़ाई कई बार प्रभावित हुई। आठवीं बोर्ड परीक्षा के दौरान विशाखापट्टनम में ऑपरेशन होने से वे परीक्षा नहीं दे सकीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आगे दसवीं की परीक्षा देकर शिक्षा जारी रखी। वर्ष 2013 में जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री हासिल की और कंप्यूटर का प्रशिक्षण भी लिया। शिक्षा के बाद उन्होंने अपना जीवन समाजसेवा के लिए समर्पित किया। वर्ष 2005 से 2009 तक निजी स्कूल में कार्य किया। इसके बाद सौर संस्थान में विशेष शिक्षक के रूप में दृष्टिबाधित बच्चों के साथ काम किया। उन्होंने दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी योजनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया।
- महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र, महिला थाना जैसलमेर में कार्य करते हुए उन्होंने महिलाओं को अधिकारों, कानूनों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक किया। जरूरतमंद महिलाओं को परामर्श देने के साथ आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
- वर्ष 2019 से 2023 तक आकाशवाणी नागौर के ‘महिला जगत’ कार्यक्रम में एंकर एवं सूत्रधार के रूप में कार्य किया। इससे सामाजिक मुद्दों को आमजन तक पहुंचाने का मंच मिला।
- वर्ष 2024 में आजीविका ब्यूरो, उदयपुर में युवाओं को प्रशिक्षण दिया। 10 जून 2025 से राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम से जुड़े कौशल विकास कार्यों में सक्रिय हैं। जिला स्तर पर युवाओं को प्रशिक्षण, कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ने में उनकी भूमिका है।
- दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा और महिला मुद्दों में योगदान के लिए उन्हें 2015 में राजकुमारी रत्नावती पुरस्कार तथा 2016 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मान मिला।
बचपन की शारीरिक चुनौती से लेकर सामाजिक सेवा और कौशल विकास तक ललिता का सफर बताता है कि संघर्ष यदि हौसले के साथ हो तो वही सफलता की सबसे मजबूत सीढ़ी बन जाता है। ललिता का संदेश है कि खुद को कभी किसी से कम मत समझिए। अपने हुनर को पहचानिए, उसे निखारिए और आत्मनिर्भर बनिए। लोगों की आलोचना को कमजोरी नहीं, अपनी ताकत बनाइए।
Updated on:
20 Aug 2026 09:15 pm
Published on:
20 Aug 2026 09:15 pm
