जैसलमेर

कटती बिजली, सिमटती कमाई, अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव

स्थानीय बाजार में आज अधिकांश गतिविधियां बिजली आधारित हो चुकी हैं। कम्प्यूटर, इंटरनेट, डिजिटल भुगतान, प्रिंटिंग, मशीनरी, रेफ्रिजरेशन, वेल्डिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, सैलून, होटल और पर्यटन सेवाएं—सबकी कार्यक्षमता विद्युत आपूर्ति से जुड़ी है।

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May 31, 2026
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बिजली कटौती का असर अब केवल पंखे, कूलर और रोशनी तक सीमित नहीं रहा। इसका आर्थिक दुष्प्रभाव बाजार की हर परत में महसूस किया जा रहा है। शहर के व्यस्त बाजारों से लेकर कस्बों की छोटी दुकानों तक, ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान कारोबार की रफ्तार को धीमा कर रहा है। सबसे अधिक दबाव उन छोटे व्यापारियों और सेवा आधारित प्रतिष्ठानों पर है जिनकी आय सीधे रोजाना होने वाले कामकाज पर निर्भर करती है।

स्थानीय बाजार में आज अधिकांश गतिविधियां बिजली आधारित हो चुकी हैं। कम्प्यूटर, इंटरनेट, डिजिटल भुगतान, प्रिंटिंग, मशीनरी, रेफ्रिजरेशन, वेल्डिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, सैलून, होटल और पर्यटन सेवाएं—सबकी कार्यक्षमता विद्युत आपूर्ति से जुड़ी है। ऐसे में कुछ घंटों की कटौती भी आर्थिक गतिविधियों की श्रृंखला को प्रभावित कर देती है।बाजार से जुड़े लोगों का आकलन है कि बार-बार होने वाली ट्रिपिंग और अनियोजित कटौती कार्य दिवस के प्रभावी घंटों को कम कर रही है। इससे उत्पादकता प्रभावित हो रही है, जबकि स्थायी खर्च पहले की तरह बने हुए हैं।अर्थशास्त्रियों के अनुसार यह ऐसा खर्च है जो उत्पादन नहीं बढ़ाता, केवल नुकसान को सीमित करने का प्रयास करता है। इससे लाभ का प्रतिशत घटता जाता है।

बिजली गई, तो कारोबार भी थमा

व्यापारी जुगत किशोर का कहना है कि बिजली बाधित होते ही केवल मशीनें नहीं रुकतीं, ग्राहक व्यवहार भी बदलता है। कई लोग खरीदारी टाल देते हैं, ऑनलाइन भुगतान प्रभावित होते हैं और सेवा क्षेत्र में कार्य निष्पादन का समय बढ़ जाता है।

जमीनी स्तर पर असर

► मशीन आधारित कार्य बार-बार बाधित

► ग्राहकों की प्रतीक्षा अवधि बढ़ी

► समय पर ऑर्डर पूरे करने में कठिनाई

► डिजिटल भुगतान और नेटवर्क सेवाएं प्रभावित

► संवेदनशील उपकरणों के खराब होने का जोखिम बढ़ा

कमाई से पहले बढ़ रहा खर्च

बिजली कटौती का सबसे बड़ा आर्थिक गणित बैकअप व्यवस्था में दिखाई देता है। कुछ वर्ष पहले तक इन्वर्टर सुविधा माने जाते थे, लेकिन अब वे आवश्यकता बन चुके हैं। कई प्रतिष्ठानों ने जनरेटर भी लगा रखे हैं।

इसका परिणाम यह हुआ कि व्यापारियों का एक हिस्सा अब बिजली बिल के साथ बैटरी रखरखाव, उपकरण मरम्मत और डीजल खर्च भी वहन कर रहा है।

अतिरिक्त आर्थिक बोझ

► इन्वर्टर और बैटरी पर निवेश

► नियमित रखरखाव खर्च

► डीजल आधारित बैकअप का खर्च

► वोल्टेज उतार-चढ़ाव से उपकरण क्षति

► परिचालन लागत में लगातार वृद्धि

एक्सपर्ट व्यू: विद्युत व्यवधान का आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव

ऊर्जा अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ डॉ. राघवेंद्र शर्मा का मानना है कि बिजली कटौती को केवल तकनीकी समस्या मानना अधूरा दृष्टिकोण होगा। यह उत्पादकता, निवेश, रोजगार और बाजार की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता से जुड़ा आर्थिक मुद्दा है। यदि किसी शहर में प्रतिदिन कुछ घंटे भी प्रभावी कार्य समय बाधित होता है तो उसका संचयी प्रभाव महीने और वर्ष के स्तर पर करोड़ों रुपए की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए निर्बाध बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक विकास की बुनियादी शर्त है।

Published on:
31 May 2026 09:35 pm
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