जैसलमेर

Jaisalmer: होटल में गैस सिलेंडर लीक होने से लगी आग, दो जने झुलसे

आग से पास ही खड़े दो जने प्रदीप व हुकमाराम झुलस गए। मौके पर खड़े लोगों ने काफी देर तक आग बुझाने की मशक्कत की। सूचना पर नगरपालिका की दमकल मौके पर पहुंची और पानी डालकर आग पर काबू किया गया। आग से झुलसे दोनों जनों को पोकरण के राजकीय अस्पताल पहुंचाया गया। यहां उनका उपचार किया गया।
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Updated: 29 Jun 2026, 8:29 PM IST
Medical emergency with patient receiving care
पोकरण. झुलसे युवक का किया जा रहा उपचार। पत्रिका

पोकरण. कस्बे में फलसूंड रोड पर एक होटल में गैस सिलेंडर लीक होने से अचानक आग लग गई, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया। इसके साथ ही आग की चपेट में आने से दो जने झुलस गए। जानकारी के अनुसार कस्बे में फलसूंड रोड पर स्थित एक होटल में सोमवार को सिलेंडर से गैस लीक होने लगी। कुछ ही देर में गैस ने अचानक आग पकड़ ली। अचानक लगी आग से एकबारगी अफरा-तफरी का माहौल हो गया और हड़कंप मच गया। आग से पास ही खड़े दो जने प्रदीप व हुकमाराम झुलस गए। मौके पर खड़े लोगों ने काफी देर तक आग बुझाने की मशक्कत की। सूचना पर नगरपालिका की दमकल मौके पर पहुंची और पानी डालकर आग पर काबू किया गया। आग से झुलसे दोनों जनों को पोकरण के राजकीय अस्पताल पहुंचाया गया। यहां उनका उपचार किया गया।

हकीकत: सुरक्षा के प्रबंध नहीं

कस्बे में दर्जनों होटलें स्थित है। इनमें से कइयों में आग से सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। देशभर में बीते दिनों हुई आग की घटनाओं के बाद नगरपालिका की ओर से होटलों, रेस्टोरेंट सहित बड़ी बिल्डिंग के मालिकों को आग से सुरक्षा के प्रबंध करने के लिए पाबंद किया जा रहा है। सोमवार को भी एक होटल में लगी आग पर दमकल के पहुंचने के बाद काबू किया जा सका। बताया जा रहा है कि यहां आग से सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं थे, जिसके कारण आग फैली और दमकल के आने के बाद ही काबू हो सका।

गांवों में अकाल के हालात, पशु शिविर शुरू करवाने की मांग

जैसलमेर. सीमांत जिले में भीषण गर्मी और इस साल अब तक हुई नगण्य मात्रा में बारिश के चलते अकाल जैसे हालात बन गए हैं। इसका सबसे बड़ा खामियाजा पशुपालकों और गोवंश आदि पशुओं को उठाना पड़ रहा है। चारे और पानी की कमी से उनके बेहाल हैं। ऐसे हालात में पंचायत समिति सम की ग्राम पंचायतों बैरसियाला और पोछीणा के प्रतिनिधियों ने सरकार की ओर से तत्काल पशु शिविर शुरू करवाने की मांग जिला प्रशासन से की गई है। ग्रामीणों के प्रतिनिधियों ने सोमवार को जिला कलक्टर को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि इन गांवों की अर्थव्यवस्था और ग्रामीणों की आजीविका पूरी तरह से गो पालन पर निर्भर है। पशुपालक महंगे दामों में चारे की व्यवस्था करने में असमर्थ हो गए हैं। सरकार की तरफ से पशु शिविर शुरू नहीं किए गए तो हालात बेकाबू हो जाएंगे।

हजारों गोवंश की जान जोखिम में

ग्रामीणों ने बताया कि समय पर बारिश न होने से चारागाह सूख चुके हैं और चारा न मिलने से गोवंश लगातार काल का ग्रास बन रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बैरसियाला, धाणेल और काठा गांवों के साथ आसपास की ढाणियों में हजारों गोवंश चारे-पानी के अभाव से जूझ रहा है। सीमावर्ती पोछीणा और उसके आसपास की ढाणियों में हजारों की तादाद में मवेशी तड़प रहे हैं। पोछीणा, करड़ा, बींजराज का तला, बाघसिंह की ढाणी, सोहनसिंह की ढाणी, मूलसिंह की ढाणी व अमरसिंह की ढाणी में भी हजारों की संख्या में गोवंश है। ग्रामीण प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि इन पंचायतों में तुरंत राहत शिविर शुरू नहीं किए, तो बेजुबान पशुओं की मौत का आंकड़ा भयावह हो सकता है। ज्ञापन देने वालों में छुगसिंह सोढ़ा, गफूरसिंह, जुगतसिंह, गिरधरसिंह करड़ा आदि शामिल थे।

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29 Jun 2026, 8:29 PM IST
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