उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वे सैनिक स्कूल चित्तौडगढ़़ के छात्र रहे हैं। पांचवी कक्षा में वर्दी पहनी थी, इसलिए वर्दी की ताकत व अहमियत उन्हें पता है।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वे सैनिक स्कूल चित्तौडगढ़़ के छात्र रहे हैं। पांचवी कक्षा में वर्दी पहनी थी, इसलिए वर्दी की ताकत व अहमियत उन्हें पता है। उन्होंने बचपन में यह भी देखा है कि वर्दी आपको किस रूप में अचानक परिवर्तित कर देती है। शुक्रवार को जैसलमेर में बीएसएफ के प्रहरी सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने सुरक्षा प्रहरियों से कहा कि उनके बीच में आकर एक नई ऊर्जा का अहसास हो रहा है। ये पल सदा यादगार रहेंगे। उन्होंने सीमा सुरक्षा बल के जवानों की कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा की और कहा कि सुरक्षा प्रहरियों का कार्य अत्यंत प्रशंसनीय और वंदनीय है। धनखड़ ने कहा कि तपती धूप में कुछ मिनट भी खड़ा रहना मुश्किल है। चारों तरफ का वातावरण चुनौतीपूर्ण है और सीमा पर आपको एकपलक झपकाने की भी फुर्सत नहीं है। धनखड़ ने कहा कि उन माताओं को नमन है, जिन्होंने वीर सुपुत्र और वीरांगनाओं को जन्म दिया है और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित किया है। उन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने जीवन को बलिदान करने वाले अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आप यहां सीमा पर तैनात हैं, इसी कारण भारतवासी एक सुरक्षित वातावरण में सो पाते हैं। उन्होंन चुनौतियों से निपटने में आधुनिक तकनीक के प्रयोग का भी आह्वान किया। इस अवसर पर बीएसएफ के महानिदेशक डॉ. नितिन अग्रवाल, पश्चिमी कमांड के एसडीजी वाईबी खुरानिया, जैसलमेर बीएसएफ के उप महानिरीक्षक विक्रम कुंवर व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।