
लाठी ( जैसलमेर ). थार मरुस्थल के शुष्क क्षेत्र में मौसम में बदलाव के साथ प्रवासी पक्षियों की आवाजाही बढ़ने लगी है। खेतोलाई तालाब पर इन दिनों डालमेशियन पेलिकन (हवासील) नजर आने से स्थानीय वन्यजीव और पक्षी प्रेमियों में उत्साह है। विशाल आकार वाले इस प्रवासी पक्षी की मौजूदगी ने क्षेत्र की जैव विविधता के साथ ही स्थानीय जलस्रोतों के महत्व को भी सामने ला दिया है। डालमेशियन पेलिकन अपनी विशाल कद-काठी, लंबी चोंच और बड़े पंखों के लिए पहचाना जाता है। प्रवास के दौरान यह पक्षी विभिन्न जलाशयों और आर्द्र क्षेत्रों में ठहरता है। थार जैसे शुष्क क्षेत्र में इसका दिखाई देना यहां मौजूद तालाबों और अन्य जलस्रोतों की उपयोगिता को रेखांकित करता है।
खेतोलाई तालाब जैसे प्राकृतिक जलस्रोत स्थानीय वन्यजीवों के साथ प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। प्रवासी पक्षियों के लिए पानी और भोजन की उपलब्धता प्रमुख जरूरत होती है। ऐसे में तालाबों और अन्य जलस्रोतों का संरक्षण क्षेत्र की जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि थार के शुष्क भूभाग में छोटे-बड़े तालाब प्रवासी पक्षियों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हैं। इन जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता बनी रहने से पक्षियों को प्रवास के दौरान ठहरने और भोजन तलाशने के लिए उपयुक्त स्थान मिलता है।
खेतोलाई निवासी पंकज विश्नोई ने बताया कि इस वर्ष क्षेत्र में बारिश कम हुई है। इसका असर आने वाले समय में जलीय प्रवासी पक्षियों की आवाजाही पर पड़ सकता है। फिलहाल तालाबों में पानी की मात्रा पर्याप्त बताई जा रही है, लेकिन आगे जलस्रोतों में पानी कितने समय तक उपलब्ध रहता है, यह प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा। खेतोलाई तालाब पर डालमेशियन पेलिकन की मौजूदगी ने एक बार फिर थार के प्राकृतिक जलस्रोतों की अहमियत सामने रखी है। जलस्रोत केवल स्थानीय वन्यजीवों के लिए पानी का आधार नहीं हैं, बल्कि प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। इनके संरक्षण और जल उपलब्धता बनाए रखने से क्षेत्र की जैव विविधता को सहारा मिल सकता है।