पश्चिमी राजस्थान में विशेष रूप से सरहदी जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में वर्षों पूर्व लोग अपनी जमीनें ओरण, गोचर, नाडी-तालाबों की आगोर के लिए देते थे, ताकि क्षेत्र के पशुधन के लिए चारे की कमी नहीं हो।
पश्चिमी राजस्थान में विशेष रूप से सरहदी जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में वर्षों पूर्व लोग अपनी जमीनें ओरण, गोचर, नाडी-तालाबों की आगोर के लिए देते थे, ताकि क्षेत्र के पशुधन के लिए चारे की कमी नहीं हो। वर्षों बाद भी क्षेत्र में ऐसी सुरक्षित हजारों बीघा भूमि राजस्व रिकॉर्ड में सिवायचक ही दर्ज है। जिनके रिकॉर्ड में शुद्धिकरण को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। गौरतलब है कि वर्षों पूर्व लोगों की आय का स्त्रोत कृषि व पशुपालन ही था। पशुधन के लिए चारे की पर्याप्त व्यवस्था करने को लेकर लोग ओरण व गोचर के लिए जमीनें देते थे, साथ ही नाडी व तालाबों की आगोर के लिए भी जमीनें आरक्षित करते थे, ताकि उनमें बारिश के दौरान पानी की आवक हो सके। शिक्षा व जागरुकता की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित ओरण, गोचर, नाडी-तालाबों व उनके आगोर की भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जा सका। हालांकि प्रदेश भर में ओरण, गोचर आदि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने के लिए अभियान व जनजागरण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे है, लेकिन अभी भी हजारों बीघा जमीनें दर्ज नहीं हो पाई है।
पोकरण क्षेत्र में दर्ज जमीनें पोकरण तहसील क्षेत्र के 124 गांवों के रिकॉर्ड को देखें तो यहां करीब 6268.711 हेक्टेयर भूमि गोचर, 32867.44 हेक्टेयर ओरण, 719.494 हेक्टेयर आगोर व 1296.4494 हेक्टेयर भूमि पायतन के रूप में दर्ज है। जबकि ऐसे दर्जनों गांव है, जहां ओरण, गोचर, आगोर, पायतन आदि दर्ज ही नहीं है। 277 में से केवल 15 नाडी दर्जक्षेत्र के गांवों में ग्रामीणों व पशुधन की प्यास बुझाने के लिए नाडियां खुदवाई गई है। क्षेत्र के 19 पटवार मंडलों में स्थित 277 नाडियों में से रिकॉर्ड में केवल 15 ही दर्ज है। 162 नाडियां रिकॉर्ड में ही नहीं है। कई पटवार मंडलों में बड़ी संख्या में नाडियां स्थित होने के बावजूद रिकॉर्ड में नहीं होने के कारण संरक्षण करना भी मुश्किल हो रहा है।
पोकरण तहसील क्षेत्र में हजारों बीघा ओरण, गोचर, नाडी-तालाब व उनके आगोर दर्ज नहीं है। जिसके कारण उनका संरक्षण भी नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र में सौर व पवन ऊर्जा के संयंत्र लग रहे है। कई गांवों में ओरण, गोचर आदि रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने के कारण ऐसी भूमि सिवायचक के रूप में इन कंपनियों को आवंटित भी हो रही है। ऐसे में इनके संरक्षण को लेकर चिंता बनी हुई है।
क्षेत्र में ओरण, गोचर, नाडी-तालाब, उनके आगोर के रूप में हजारों बीघा भूमि स्थित है। जिनके राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने के कारण संरक्षण नहीं हो रहा है। इसके लिए पुराना रिकॉर्ड खंगालकर भूमि को दर्ज करवाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। साथ ही जनजागरण के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है।
बलवंतसिंह जोधा, संयोजक ओरण-गोचर, तालाब संरक्षण संघर्ष समिति, पोकरण