जैसलमेर की प्रमुख आवासीय कॉलोनियों में शामिल और इन दिनों बेहद महंगे भूखंडों के लिए चर्चित लक्ष्मीचंद सांवल कॉलोनी के बाशिंदों को नि:शुल्क टैंकरों के जरिए की जाने वाली जलापूर्ति पर पिछले दो माह से अधिक समय से लगा अवरोध आगामी दिनों में हटने की उम्मीद जगी है।
जैसलमेर की प्रमुख आवासीय कॉलोनियों में शामिल और इन दिनों बेहद महंगे भूखंडों के लिए चर्चित लक्ष्मीचंद सांवल कॉलोनी के बाशिंदों को नि:शुल्क टैंकरों के जरिए की जाने वाली जलापूर्ति पर पिछले दो माह से अधिक समय से लगा अवरोध आगामी दिनों में हटने की उम्मीद जगी है। नगरपरिषद की तरफ से गत नवम्बर माह में सांवल कॉलोनी सहित शहर के अन्य समस्याग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों से जलापूर्ति के लिए शुरू की गई टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। नगरपरिषद ने 6 महीनों की अवधि में टैंकरों से जलापूर्ति की शहरी क्षेत्र में व्यवस्था के लिए 147.30 लाख रुपए का टेंडर जारी किया था। जानकारी के अनुसार करीब 1 करोड़ रुपए में यह काम करने का न्यूनतम दर वाला टेंडर स्वीकृति के लिए नगर निगम जोधपुर के अधीक्षण अभियंता को भिजवाया गया है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इस संबंध में कार्यादेश जारी किया जाएगा। माना जाता है कि उसके तुरंत बाद टैंकरों से जलापूर्ति का रास्ता प्रशस्त होगा। गौरतलब है कि नगरपरिषद ने यह व्यवस्था मुख्यत: सांवल कॉलोनी को ध्यान में रख कर किया है।
नगरपरिषद ने वर्ष 2008 में सांवल कॉलोनी का आवंटन किया था और उसके बाद अब तक करीब 17 साल बाद भी अब तक इस कॉलोनी में नलों के जरिए पानी नहीं पहुंचाया जा सका है। जबकि तत्कालीन नगरपालिका को इसके जरिए करोड़ों रुपए की आय हुई थी। उसके बाद पिछले लगभग दो वर्ष से नगरपरिषद की ओर से निर्धारित संख्या में नियमित रूप से कॉलोनी के घरों में नि:शुल्क टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही थी। यह व्यवस्था गत 28 अक्टूबर से ठप हो जाने के बाद से कॉलोनी के बाशिंदे हैरान-परेशान चल रहे हैं। इस बीच जिला प्रशासन के दखल के बाद नगरपरिषद ने कॉलोनी सहित शहर में टैंकरों से पीने के पानी की व्यवस्था करने के लिए नया टेंडर जारी किया।
लक्ष्मीचंद सांवल कॉलोनी में अब तक वहां पीने के पानी की व्यवस्था नहीं हो पाने से यहां रहने वाले करीब 1000 घरों की आबादी को प्रतिमाह 2000 से 4000 रुपए तक का खर्च पानी पर करना पड़ रहा है। जब कॉलोनी के रहवासियों की तरफ से धरना-प्रदर्शन किए गए तो दो वर्ष पूर्व नगरपरिषद ने प्रतिमाह प्रति घर 4 ट्रैक्टर टैंकर पानी आपूर्ति करने का निर्णय लिया। इसके अनुसार यह व्यवस्था संचालित होती रही। जानकारी के अनुसार कॉलोनी में प्रतिमाह करीब 2500 टैंकर पानी की आपूर्ति नगरपरिषद की ओर से करवाई जाती रही है। गत 28 अक्टूबर को अचानक टैंकर ठेकेदार की ओर से पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। दरअसल, नगरपरिषद सांवल कॉलोनी में जलापूर्ति पर प्रतिमाह करीब 10 लाख रुपए का व्यय करती रही है। इसका बिल जब 30 लाख रुपए से भी अधिक आ गया तो नगरपरिषद प्रशासन ने बिल के भुगतान पर रोक लगा दी। यह विवाद जिला प्रशासन तक पहुंच गया।
टैंकरों से जलापूर्ति बंद हो जाने के बाद लक्ष्मीचंद सांवल कॉलोनी विकास समिति के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से नगरपरिषद और जलदाय विभाग तक के अधिकारियों के यहां चक्कर काटे। यह समस्या क्षेत्रीय विधायक तक भी पहुंचाई गई।
नगरपरिषद ने शहरी क्षेत्र में टैंकरों के जरिए पीने के पानी की आपूर्ति की निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब दर स्वीकृति की फाइल अधीक्षण अभियंता के पास भेजी गई है। वहां से मंजूरी मिलने के तत्काल बाद कार्यादेश जारी कर दिया जाएगा।