जैसलमेर

सोनार दुर्ग बना ग्लोबल आइकन, हेरिटेज संग टूरिज्म को मिल रही नई उड़ान

पीत पाषाणों की आभा से दमकता ऐतिहासिक सोनार दुर्ग आज वैश्विक पहचान का मजबूत प्रतीक बन चुका है। करीब 870 वर्षों से अपनी स्थापत्य भव्यता और सांस्कृतिक जीवंतता के कारण यह दुर्ग देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है।

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Apr 17, 2026

पीत पाषाणों की आभा से दमकता ऐतिहासिक सोनार दुर्ग आज वैश्विक पहचान का मजबूत प्रतीक बन चुका है। करीब 870 वर्षों से अपनी स्थापत्य भव्यता और सांस्कृतिक जीवंतता के कारण यह दुर्ग देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। हर वर्ष दस लाख से अधिक पर्यटक इस अनूठे किले को देखने पहुंचते हैं। वर्ष 2013 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और बढ़ी है। सोनार दुर्ग विश्व के चुनिंदा लिविंग फोर्ट में शामिल है, जहां आज भी करीब साढ़े तीन से चार हजार लोग निवास करते हैं। किले के भीतर पारंपरिक जीवनशैली आज भी जीवंत है, जो इसे अन्य धरोहर स्थलों से अलग पहचान देती है। ऊंची प्राचीरें, 99 बुर्ज और घुमावदार गलियां यहां की स्थापत्य उत्कृष्टता का प्रमाण हैं।

संघर्ष और समृद्धि का इतिहास

वर्ष 1156 में तत्कालीन महारावल जैसलदेव ने इस दुर्ग की स्थापना की। इसके बाद विभिन्न शासकों ने समय-समय पर इसका विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया। यह किला केवल सैन्य दृष्टि से ही नहीं, बल्कि व्यापार और संस्कृति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा। सिल्क रूट का अहम पड़ाव होने के कारण यहां से मध्य एशिया तक व्यापारिक गतिविधियां संचालित होती थीं। इसी कारण जैसलमेर कला, संगीत और व्यापार का समृद्ध केंद्र बना।
लिविंग फोर्ट की अनूठी पहचान
-सोनार दुर्ग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जीवंतता है।

-यहां आज भी लोग रहते हैं, व्यापार होता है और पारंपरिक जीवनशैली कायम है।
-किले के भीतर घर, मंदिर और गलियां आज भी उसी स्वरूप में नजर आते हैं, जो सदियों पहले थे।

हकीकत यह भी: बढ़ता दबाव, संरक्षण की चुनौती

यूनेस्को की मान्यता के बाद संरक्षण कार्यों में गति आई, लेकिन चुनौतियां अभी भी कम नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती पर्यटक संख्या और जल निकासी की कमजोर व्यवस्था किले की संरचना के लिए खतरा बन रही है। पिछले कुछ वर्षों में पानी के रिसाव ने किले को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सख्त नियमों के कारण कई जरूरी निर्माण और मरम्मत कार्य प्रभावित होते रहे हैं। ऐसे में किले के संरक्षण के लिए संतुलित नीति, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और पर्यटकों की संख्या का नियंत्रण जरूरी माना जा रहा है।
अच्छी खबर: अब बदलेगा पर्यटन अनुभव, सुविधाओं का होगा विस्तार
-पर्यटन को और सशक्त बनाने के लिए किले के चारों ओर हेरिटेज वॉकवे विकसित किया जा रहा है।

-नगरपरिषद ने 47.78 करोड़ की इस परियोजना के लिए टेंडर जारी किया है।
-वॉकवे नीरज चौराहा से शिव रोड, गोपा चौक और रिंग रोड होते हुए पूरे किले की परिक्रमा करेगा।

-इस मार्ग पर जैसलमेरी पीले पत्थर के कोबल्स बिछाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र पारंपरिक सौंदर्य के साथ आधुनिक स्वरूप में नजर आएगा।
-गोल्फ कार्ट की व्यवस्था से पर्यटक बिना प्रदूषण और शोर के भ्रमण कर सकेंगे।

-परियोजना में आधुनिक सार्वजनिक शौचालय, फूड कार्ट जोन, आकर्षक लाइटिंग और बैठने की व्यवस्था शामिल है।
-दिव्यांगजन के लिए भी विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

-रात में रोशनी से जगमगाता यह क्षेत्र रात्रिकालीन पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

फैक्ट फाइल

-1156 में सोनार किले की स्थापना

-2013 में यूनेस्को सूची मे शामिल
-3500 से अधिक आबादी निवासरत

-99 बुर्ज और मजबूत प्राचीर

एक्सपर्ट व्यू: सिल्क रूट का प्रमुख व्यापारिक केंद्र

पर्यटक स्वागत केंद्र के सहायक निदेशक कमलेश्वर सिंह के अनुसार सोनार दुर्ग स्थापत्य और इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है। सदियों पुराने इस किले ने अनेक आक्रमणों के बावजूद अपनी मजबूती बनाए रखी है। इसकी संरचना और डिजाइन आज भी शोध का विषय बने हुए हैं। किले के भीतर निवास करती आबादी इसे जीवंत बनाती है, जो विश्व स्तर पर दुर्लभ है। यह दुर्ग केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि संस्कृति, कला और जीवनशैली का जीवंत प्रतीक है, जिसे संरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।

Published on:
17 Apr 2026 08:28 pm
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