इतिहास की परतों में ढकी जैसलमेर की धरोहर अब फिर से अपनी असली पहचान पाने लगी है।
इतिहास की परतों में ढकी जैसलमेर की धरोहर अब फिर से अपनी असली पहचान पाने लगी है। देश-दुनिया के पर्यटकों को लुभाने वाला सोनार दुर्ग का प्रवेश द्वार अब अपने मूल स्वरूप की ओर लौट रहा है। लंबे समय तक दुर्ग के प्रवेश द्वार अखे प्रोल के सामने मौजूद अतिक्रमण और अवरोधक रचनाएं इसकी भव्यता पर परदा डाल रही थीं। अब नगरपरिषद प्रशासन की कवायद के चलते दुर्ग की असल छवि सामने आ रही है।
अखे प्रोल के आगे वर्षों से बना चुग्गाघर अब हटाया जा चुका है। सोनार दुर्ग के प्रवेश द्वार के दोनों ओर बने गोलाकार स्थापत्य अब पहली बार पूरे विस्तार में नजर आने लगे हैं। किले का मुख्य प्रवेश मार्ग और चौड़ा हो गया है। इससे सैलानियों की आवाजाही भी पहले की तुलना में काफी सहज हो गई है। प्रवेश द्वार के ठीक सामने लगे राष्ट्रीय ध्वज को भी अब स्थानांतरित किया जा चुका है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से औपचारिक अनुमति मिलने के बाद नगरपरिषद ने उसे किला पार्किंग क्षेत्र में शिफ्ट करवा दिया।
नगरपरिषद सूत्रों के अनुसार अब अगला बड़ा कदम टैक्सी स्टैंड को वहां से हटाने का है। वर्तमान में प्रवेश द्वार के सामने दर्जनों टैक्सियां खड़ी रहती हैं, जिससे न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि पर्यटक दुर्ग की भव्यता का पहला दृश्य ही नहीं देख पाते। प्रस्ताव के अनुसार इस स्टैंड को किला पार्किंग क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाएगा।
इसके साथ ही दुर्ग से पार्किंग स्थल तक जाने वाले मार्ग पर स्थित गोपा चौक की पुरानी पुलिस चौकी को भी हटाने की योजना तैयार है। इससे सैलानियों को पार्किंग से दुर्ग तक का रास्ता अधिक खुला और व्यवस्थित मिलेगा।
सोनार दुर्ग की ऐतिहासिकता और सुंदरता को संरक्षित करना हमारी प्राथमिकता है। राष्ट्रीय ध्वज को किला पार्किंग में स्थानांतरित कर दिया गया है। चुग्गाघर हटाने की कार्रवाई की जा रही है। नगरपरिषद की कार्ययोजना तैयार है, जिससे दुर्ग का सौंदर्य पूर्ण रूप से उभर सके।
-लजपालसिंह सोढ़ा, आयुक्त, नगर परिषद जैसलमेर।