प्रतिवर्ष माघ शुक्ल की पूॢणमा के अवसर पर मरु-महोत्सव की अंतिम शाम जग विख्यात सम सैंड ड्यून्स पर मनाई जाती रही है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने जा रहा है।
प्रतिवर्ष माघ शुक्ल की पूॢणमा के अवसर पर मरु-महोत्सव की अंतिम शाम जग विख्यात सम सैंड ड्यून्स पर मनाई जाती रही है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने जा रहा है। आगामी 29 जनवरी से 1 फरवरी तक पोकरण से लेकर जैसलमेर व सम होते हुए इस महोत्सव का अंतिम सफर खुहड़ी के धोरों पर संपन्न होगा। यह 47वें वर्ष में मरु महोत्सव के इतिहास में बड़ा बदलाव है। हर साल सम सैंड ड्यून्स पर होने वाला मरु-महोत्सव का समापन इस बार खुहड़ी के धोरों में आयोजित किया जाएगा। प्रशासन और पर्यटन विभाग की संयुक्त बैठकों में इस बदलाव पर अंतिम मुहर लगाई गई है।
चार दिन तक चलने वाले इस रंग-राग और लोक-संस्कृति के उत्सव की अंतिम संध्या खुहड़ी में सजेगी, जहां थार की लोकधरोहर पारंपरिक अंदाज में सैलानियों के सामने प्रस्तुत होगी। अब तक इस महोत्सव का समापन सम क्षेत्र में होता रहा है, लेकिन इस बार लोकेशन बदलने का निर्णय लिया गया। खुहड़ी को वैकल्पिक और बेहतर स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इससे पर्यटन गतिविधियों का विकेंद्रीकरण होगा और सम के साथ-साथ खुहड़ी को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
मरु महोत्सव का समापन कार्यक्रम सम की बजाए खुहड़ी किए जाने से एक तरफ सम क्षेत्र के रिसोर्ट आदि व्यवसायियों में मायूसी है, वहीं खुहड़ी में पर्यटन से जुड़े लोगों में खुशी का वातावरण है। सम क्षेत्र के व्यवसायियों ने इस संबंध में प्रशासन से गुहार भी लगाई थी। दूसरी तरफ इसे खुहड़ी को प्रोत्साहित किए जाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है। स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों का मानना है कि इस बदलाव से खुहड़ी क्षेत्र के रिसॉट्र्स, कैंप्स और स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि मरु-महोत्सव जैसे बड़े आयोजन को केवल सम तक सीमित न रखा जाए। अब खुहड़ी को भी मुख्य मंच मिलने से क्षेत्र के पर्यटन को नई गति मिलेगी।
सम क्षेत्र में हर बार की तरह मरु-महोत्सव के महत्वपूर्ण कार्यक्रम इस बार भी होंगे। जहां तक समापन की बात है, खुहड़ी के ड्यून्स इस आयोजन के लिए एकदम उपयुक्त पाए गए। वैसे, प्रतिवर्ष बारी-बारी से सम और खुहड़ी में मरु महोत्सव का समापन किया जा सकता है।