धोरों की धरती से निकले बास्केटबॉल के सितारे आज न केवल भारत का मान बढ़ा रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई इबारत लिख रहे हैं।
थार के रेगिस्तान की तपती रेत, सीमित सुविधाएं और संसाधनों की कमी… लेकिन इन सब पर भारी पड़ा जैसलमेर का जुनून और जज्बा..। धोरों की धरती से निकले बास्केटबॉल के सितारे आज न केवल भारत का मान बढ़ा रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई इबारत लिख रहे हैं। हाल ही में यूथ साउथ एशियन बास्केटबॉल चैंपियनशिप 2025 में अकादमी के खिलाड़ी मोहम्मद रजा ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम ऊंचा किया, वहीं मोहम्मद राजा भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ स्कोरर साबित हुए। उन्होंने चार मैचों में 85 अंक अर्जित किए और फाइनल में अकेले 38 अंक ठोककर श्रीलंका को पराजित किया। इस प्रदर्शन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। जैसलमेर बास्केटबॉल अकादमी से जुड़े खिलाडिय़ों ने चीन का मकाउ, इस्तांबुल (तुर्की), तेहरान, ढाका, रूस, जॉर्डन, काठमांडू, थाईलैंड, मलेशिया और अब मालदीव्स तक भारत की जीत का परचम लहराया है।
जैसलमेर बास्केटबॉल अकादमी ने पिछले चार वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर लगातार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी बादशाहत कायम रखी है। हाल ही में कोलकाता यूथ नेशनल में अकादमी के खिलाड़ी भूपेंद्र सिंह राठौड़ को मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर चुना गया। उन्हें भारतीय बास्केटबॉल संघ ने 50 हजार रुपए का नगद पुरस्कार भी प्रदान किया।
वर्ष 2009 से 2025 तक बॉस्केटबॉल की उपलब्धियों का इतिहास
-राष्ट्रीय उपलब्धियां : 56 स्वर्ण, 42 रजत और 36 कांस्य पदक
राज्य स्तरीय उपलब्धियां: 31 स्वर्ण, 19 रजत और 8 कांस्य पदक
अब तक 29 खिलाड़ी भारतीय रेलवे, बीएसएफ, थल सेना, सीआरपीएफ, राजस्थान पुलिस और भारतीय जल सेना जैसी सेवाओं में नियुक्त हो चुके हैं।
जैसलमेर केवल बास्केटबॉल तक सीमित नहीं। यहां की हैंडबॉल अकादमी भी अपनी पहचान बना रही है। अब तक हैंडबॉल के चार खिलाड़ी और बास्केटबॉल के आठ खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
जैसलमेर बास्केटबॉल अकादमी के प्रशिक्षक एवं जिला खेल अधिकारी राकेश बिश्नोई बताते हैं कि खिलाडिय़ों को नियमित प्रशिक्षण उन्हें अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर विजय दिलाने में सहायक बनता है। उन्होंने कहा कि रेगिस्तान की धरती पर मुश्किलें बहुत हैं, लेकिन खिलाडिय़ों की मेहनत और आत्मविश्वास ही उन्हें शिखर तक ले जा रहा है।