गत 10 दिनों से तो दिन के साथ ही रात में भी विद्युत की आवाजाही हो रही है। साथ ही ट्रांसफार्मरों में आग लगने, फ्यूज उड़ जाने और तारों में फॉल्ट आने से कई घंटों तक बिजली गुल हो रही है।
पोकरण कस्बे में गत कई दिनों से बिगड़ी विद्युत आपूर्ति व्यवस्था के कारण आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे के कई गली-मोहल्लों में वर्षों पुराने विद्युत पोल व तारें लगी हुई है। हालांकि बढ़ती आबादी के साथ नए विद्युत पोल, तारों के साथ ही ट्रांसफार्मर भी लगाए गए है, लेकिन बढ़ते लोड के कारण ये नाकाफी सिद्ध हो रहे है। ऐसे में आए दिन विद्युत की आवाजाही व आंख-मिचौनी का दौर चलता रहता है, जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गत 10 दिनों से तो दिन के साथ ही रात में भी विद्युत की आवाजाही हो रही है। साथ ही ट्रांसफार्मरों में आग लगने, फ्यूज उड़ जाने और तारों में फॉल्ट आने से कई घंटों तक बिजली गुल हो रही है।
कस्बे की आबादी लगातार बढ़ रही है। स्थानीय के साथ ही आसपास गांवों के लोग भी कस्बे की तरफ पलायन कर रहे है। पर्यटन नगरी होने के साथ रामदेवरा में प्रत्येक माह उमडऩे वाली श्रद्धालुओं की भीड़ और आसपास सोलर, पवन ऊर्जा कंपनियों के कारण बाहरी लोगों की आवक से होटलों, गेस्ट हाऊस की संख्या भी बढ़ गई है। जिससे लोड बढ़ गया है। साथ ही घरों में कूलरों की बजाय एसी की संख्या बढ़ रही है। हालांकि बीते एक वर्ष में 25-30 से अधिक नए ट्रांसफार्मर लगाए गए है, लेकिन लोड बढऩे के कारण समस्या कम नहीं हो रही है।
कस्बे में विद्युत कनेक्शनों की संख्या अधिक होने से पोल पर तारों का जंजाल है। ऐसे में कई बार बिजली गुल होने पर फॉल्ट मिलने में ही समय लग जाता है। लोगों की ओर से बिजली गुल होने पर डिस्कॉम अधिकारियों के साथ एफआरटी को शिकायत की जाती है। इस दौरान अधिकारी कभी कभार ही फोन उठाते है। कुछ दिन पूर्व मंगलपुरा क्षेत्र में 14 घंटे बिजली गुल रही, लेकिन किसी अधिकारी ने फोन पर जवाब देना भी उचित नहीं समझा।
कस्बे में लोड अधिक बढ़ गया है। विशेष रूप से कस्बे के गांधी चौक और भीतरी भागों में लगे ट्रांसफार्मर में आग की घटनाएं आम बात हो गई है। इस दौरान एक घंटे तक कस्बे की बिजली गुल हो जाती है। वर्तमान में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। पश्चिमी राजस्थान में आंधियों व बारिश का दौर अब शुरू होगा। जून माह में आंधियां चलने और आगे मानसून की सीजन में बारिश, तूफान के दौरान बिजली की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाने का खतरा बना हुआ है, जबकि जिम्मेदार व्यवस्था सुधारने को लेकर कोई ध्यान नहीं दे रहे है।