महज पैसा कमाने के लिए मैं अपना स्तर नहीं गिरा सकता, विख्यात फिल्म निर्देशक अनुराग बसु के साथ ‘राजस्थान पत्रिका’ की विशेष बातचीत
-परिवार के साथ जैसलमेर भ्रमण पर आए हुए हैं बसु
जैसलमेर. ‘हम फिल्म वालों ने अपने दर्शकों को कुछ बंधे-बंधाए फार्मूलों में बंध कर सिनेमा देखने का आदी बना दिया है। ऐसे में किसी भी तरह से पैसा कमाने की ललक में दर्शकों को मनोरंजन के नाम पर कई तरह की फूहड़ फिल्में परोसी जाती हैं, लेकिन कम से कम मैं सिर्फ पैसा कमाने के लिए स्तरहीन काम नहीं कर सकता।इसलिए मैंने तय किया है कि, फिलहाल फिल्में नहीं बनाऊंगा।’ अपने परिवार के साथ जैसलमेर घूमने आए विख्यात फिल्म निर्देशक और लेखक अनुराग बसु ने ‘राजस्थान पत्रिका’ के साथ विशेष बातचीत में यह बात कही। बसु ने विभिन्न मसलों पर
जैसलमेर भ्रमण कर खुश नजर आया बसु परिवार
बहुमुखी प्रतिभा के धनी अनुराग बसु, पत्नी तानी बसु और दोनों पुत्रियों के साथ मंगलवार को जैसलमेर पहुंचे।वे यहां सामान्य सैलानी की भांति सोनार दुर्ग की होटल में ऑनलाइन बुकिंग करवाने के बाद रुके हैं।होटल संचालक पंकज पुरोहित ने बताया कि, उन्हें भी पता नहीं था कि, अनुराग बसु कौन हैं।होटल में ठहरे अन्य मेहमानों ने उन्हें पहचाना। बहरहाल, अनुराग व उनके परिवारजनों ने बुधवार को सोनार दुर्ग का करीब से अवलोकन किया।रंगकर्मी विजय बल्लाणी ने उन्हें शहर भ्रमण करवाया।शाम के समय वे कुलधरा व सम सेंडड्यून्स देखने गए।उन्होंने जैसलमेर को ऐतिहासिक व कलात्मक शहर बताया और कहा कि, यह नायाब नगर है।कईलोगों ने शहर में भ्रमण के दौरान उनके साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई।बसु ने भी सहजता के साथ सबके साथ फोटो खिंचवाए।
की खुलकर बात
पत्रिका :आपने कभी ‘गैंगस्टर’ और ‘बरफी’ जैसी हिट फिल्में दी। फिर आपने ‘जग्गा जासूस’ बनाई, जो लोगों को शायद समझ ही नहीं आई?
बसु :‘गैंगस्टर’ मैंने दस वर्ष पहले बनाई थी।इतनी अवधि में मैं वहीं ठिठक कर तो नहीं रह सकता।निरंतर अध्ययन और कार्य करते हुए मुझमें बदलाव आए हैं और वे जाहिराना तौर पर मेरे काम पर भी दिखाई देंगे।‘जग्गा जासूस’ लोगों को शायद समझ नहीं आई और इसमें गलती भी हम फिल्मवालों की है क्योंकि हमने उन्हें फार्मूलों में बंधकर फिल्में देखने वाला बना दिया है।वे नए तरह के सिनेमा को अब देखना ही नहीं चाहते। वहीं दूसरी तरफ विदेशों में सभी तरह की फिल्मों को दर्शक मिलते हैं।मेरी फिल्म ‘जग्गा जासूस’ को तुर्की, रूस आदि में खूब पसंद किया जा रहा है और यह कईपुरस्कार भी जीत रही है।
पत्रिका : अभी आप कौनसी फिल्म पर काम कर रहे हैं?
बसु :मैंने साफ तौर पर कहा है कि, अभी मैं फिल्में नहीं बनाऊंगा क्योंकि जैसी फिल्में इन दिनों पसंद की जा रही हैं, वैसी मैं बनाना नहीं चाहता।मेरा ध्यान इन दिनों लेखन की तरफ है। फिर मैं चित्रकारी भी करना चाहता हूं।
पत्रिका :आज के दौर की हिट फिल्मों के बारे में क्या कहेंगे?
बसु :यह पोल डांस की तरह है।मैं पैसों के लिए पोल डांस नहीं कर सकता।जबकि मैं चाहूं तो ऐसी फिल्म बनाना मेरे लिए कतई मुश्किल नहीं है।
पत्रिका :अभी आप ‘डांस इंडिया डांस’ जैसे कार्यक्रम में बतौर जज दिखाई दे रहे हैं, यह क्या है?
बसु :(हंसते हुए) घर चलाने के लिए सप्ताह में दो दिन यह ‘पोल डांस’ करना पड़ रहा है।वैसे टीवी से मेरा नाता बहुत पुराना है।मैंने फिल्मों में आने से पहले एकता कपूर के लिए कईपारिवारिक ड्रामा से संबद्ध सीरियल बनाए हैं।लेकिन आप देखिए, वर्ष 2000 में हमारा टीवी जहां था, वह आज सत्रह वर्ष बाद भी वहीं का वहीं है।
पत्रिका :क्या आप पहले कभी जैसलमेर आए हैं, कैसा लगा यह शहर?
बसु :नहीं, मैं पहले कभी जैसलमेर नहीं आया।मेरी पत्नी तानी बसु जरूर अपने बचपन में यहां घूमने आई हुई हैं।यह शहर वाकईबहुत खूबसूरत है और कई सदियों पुराना भी।क्या पता, मुझे यहां से कोई कहानी मिल जाए।