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नहीं कटेगा एक भी पेड़…हाईकोर्ट का सख्त आदेश, ओरण भूमि के दावे की जांच करेगी एक्सपर्ट कमेटी

राजस्थान के जैसलमेर जिले में ओरण भूमि के दावे की जांच एक्सपर्ट कमेटी करेगी। जांच होने तक राजस्थान हाईकोर्ट ने एक भी पेड़ काटने पर रोक लगा दी है। विवादित भूमि पर पेड़ों की कटाई पर पहले से लगी अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक जारी रहेगी।

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Jaisalmer Oran land claims to be probed by expert panel tree cutting ban continues on Rajasthan HC order

Oran Land Dispute (Patrika File Photo)

Oran Land Dispute: राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर जिले की एक भूमि को लेकर उठे ओरण (पवित्र वन) होने के दावे की जांच एक्सपर्ट कमेटी से कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने विवादित भूमि पर पेड़ों की कटाई पर पहले से लगी अंतरिम रोक को अगली सुनवाई तक जारी रखा है।

न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने यह आदेश मुकंद सिंह भाटी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि खसरा संख्या 386, जो करीब 2587 बीघा भूमि है, पूर्व में रिकॉर्ड में ओरण भूमि के रूप में दर्ज थी और यह रोहिडालाराय मंदिर से जुड़ी पवित्र भूमि है।

याचिका में कहा गया कि इस क्षेत्र में खेजड़ी, जाल, बेर, रोहिड़ा, धामन और सेवण सहित बड़ी संख्या में पेड़ मौजूद हैं तथा यहां मां देधसर तालाब भी स्थित है। इसके समर्थन में पुराने राजस्व रिकॉर्ड और तस्वीरें भी कोर्ट में पेश की गई।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार प्रश्नगत स्थान पर ओरण भूमि दर्ज नहीं है। हालांकि, वहां 3489 बड़े और 3093 छोटे पेड़ होने की बात स्वीकार की गई।

निजी पक्ष की ओर कहा गया कि कंपनी को भूमि आवंटन से जुड़ी सभी शर्तों का पालन किया जाएगा और यदि पेड़ों या हरित क्षेत्र में कोई कमी आती है तो उसके लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों की मौजूदगी के कारण मामले की गंभीरता से जांच जरूरी है।

पहचान और संरक्षण आवश्यक

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के टी.एन. गोदावर्मन मामले में दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि ओरण जैसे पवित्र वनों की पहचान और संरक्षण आवश्यक है। कोर्ट ने राज्य में पवित्र वनों की पहचान के लिए गठित पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति को निर्देश दिया कि वह खसरा संख्या 386 की भूमि की जांच कर यह रिपोर्ट दे कि क्या यह भूमि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत संरक्षित ओरण भूमि की श्रेणी में आती है या नहीं।

समिति को 20 मई 2026 तक अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। तब तक कोर्ट ने विवादित भूमि पर पेड़ काटने पर लगी अंतरिम रोक को जारी रखने का आदेश दिया है।