300 किलोमीटर दूर बैठे अधिकारी को दे दिया अतिरिक्त चार्ज
300 किलोमीटर दूर बैठे अधिकारी को दे दिया अतिरिक्त चार्ज
झालावाड़। सरकार को करोड़ों का राजस्व देने के बाद भी जिले की कृषि उपज मंडियां बदहाल है। ये मंडिया हर साल करीब 29 करोड़ का राजस्व दे रही है। कर्मचारियों और सुविधाओं की कमी के चलते किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई मंडियों में तो 15 में से 14 पद खाली हैं। पूरा काम ठेका कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है, जिससे नीलामी और सरकारी खरीद में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मंडियों का काम एक ही सचिव के भरोसे चल रहा है। हालत यह है कि जिले से साढ़े तीन सौ किलोमीटर दूर बैठे अधिकारी को दो-दो मंडियों का अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया है। ऐसे में मंडियों की समुचित तरीके से निगरानी नहीं हो पा रही। यहां आए दिन किसानों की जिंस की चोरी हो रही है।
जिले की सात मुख्य मंडियों में से सिर्फ झालरापाटन में ही स्थायी सचिव है। शेष कार्यवाहकों के भरोसे चल रही है। इनमें दो मंडियों का अतिरिक्त कार्यभार भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ मंडी के सचिव को सौंप रखा है। ऐसे में करीब 300 किलोमीटर दूर से जिले की दो मंडियों की व्यवस्था संभलना लोहे के चने चबाने के बराबर है।
जिले की मंडियों में वरिष्ठ लिपिक, कनिष्ठ सहायक, सूचना सहायक, चौकीदार, सफ ाई कर्मी और जलवाहक जैसे कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। स्थायी कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी जगह नई नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं।
मंडी सचिव
झालरापाटन स्थायी
अकलेरा झालरापाटन सचिव के पास अतिरिक्त चार्ज
खानपुर बारां सचिव के पास अतिरिक्त चार्ज
चौमहला रामगंजमंडी सचिव के पास अतिरिक्त चार्ज
डग मांडलगढ़ सचिव के पास अतिरिक्त चार्ज
भवानीमडी मांडलगढ़ सचिव के पास अितरिक्त चार्ज
मनोहरथाना छबड़ा सचिव के पास अतिरिक्त चार्ज
हर मंडी से करोड़ों का राजस्व
जिले की प्रमुख मंडियों से हर साल सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त होता है।
अकलेरा -4.20 करोड़
झालरापाटन- 4.75 करोड़
भवानीमंडी - 8.80 करोड़
चौमहला- 3.50 करोड़
डग-1 करोड़
खानपुर- 6.28 करोड़
मनोहरथाना- 1.10 करोड़
‘‘स्टाफ की कमी के कारण मॉनिटरिंग सहित कई कार्यों में दिक्कत आती है। सरकार को मांग भेजी गई है। फि लहाल ठेका कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा हैई लेकिन स्थायी नियुक्तियां होने पर व्यवस्थाएं बेहतर हो सकेंगी