झुंझुनूं जिला कलक्टर (आईएएस) चिन्मयी गोपाल के लिए सोमवार का दिन अच्छा नहीं रहा। वे एक के बाद एक दो घटनाओं के लिए चर्चा में रही।
झुंझुनूं। राजस्थान की झुंझुनूं जिला कलक्टर (आईएएस) चिन्मयी गोपाल सोमवार को दो अलग-अलग कारणों से चर्चा में रहीं। पहला कारण उनकी कार का एक्सीडेंट होने की घटना हुई जिसमें वे बाल-बाल बच गईं, जबकि इसी दिन उनके नाम के सुर्ख़ियों में रहने का दूसरा कारण बना एक तहसीलदार द्वारा उनपर लगाया गया दुर्व्यवहार का आरोप।
झुंझुनूं जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल सोमवार को सिंघाना-बुहाना सड़क मार्ग पर कार व मिनी बस की भिड़ंत में पांच की मौत व 22 जनों के घायल होने की सूचना पर घायलों से कुशलक्षेम पूछने जा रहीं थीं। इसी दौरान हुक्मा की ढाणी के पास उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया।
हालांकि गनीमत ये रही कि वो पूरी तरह से सुरक्षित रहीं, लेकिन उनका वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। जिला कलक्टर उस समय कार में ही मौजूद थी। कार चालक को ज़रूर मामूली चोट आई है। हादसे के बाद जिला कलक्टर को दूसरी कार से झुंझुनूं रवाना किया गया।
झुंझुनूं जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल पर तहसीलदार सुरेंद्र चौधरी व अन्य ने सीधे तौर पर दुर्व्यवहार करने, पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्य करने व मीटिंगों में गरिमामय शब्दों का उपयोग नहीं करने के आरोप लगाए हैं। इस संबंध में राजस्थान के मुख्य सचिव के नाम एसडीएम सुमन सोनल को ज्ञापन दिया गया है।
राजस्थान राजस्व सेवा परिषद के लैटरहैड पर दिए ज्ञापन में आरोप लगाया कि कलक्टर ने 12 मार्च को तहसीलदार को सत्रह सीसीए का नोटिस जारी किया। यह तहसीलदार को 14 मार्च को मिला। इसमें बिंन्दू संया तीन, चार व पांच का आधार कलक्टर के 13 फरवरी के निरीक्षण को बताया गया।
ज्ञापन में बताया कि इस तारीख को कलक्टर ने तहसील का भौतिक निरीक्षण ही नहीं किया। इसके अलावा आरोप लगाया कि बनवारी लाल की सारहीन शिकायतों को कलक्टर तरजीह दे रही है। ज्ञापन पर तहसीलदार सुरेन्द्र चौधरी, राजस्थान कानूनगो संघ के जिलाध्यक्ष उमेद सिंह महला व पटवार संघ के जिलाध्यक्ष होशियार सिंह के हस्ताक्षर हैं। उल्लेखनीय है इससे पहले तहसीलदार व कर्मचारी प्रदर्शन कर चुके।
इस बारे में जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल पर फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
तहसीलदार पर जमीनों की रजिस्ट्री में गबन का आरोप लगा था। कलक्टर ने इसकी जांच नवलगढ़ एसीएम हवाई सिंह यादव को सौंपी थी। चार दिन पहले जांच के लिए एसीएम ने फोन पर सवाल किए तो तहसीलदार सुरेन्द्र चौधरी की तबीयत खराब हो गई। इस पर बीडीके अस्पताल में उनकी जांच कराई गई। इसके बाद कर्मचारियों ने तहसीलदार को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए धरना दिया था।