
राजस्थान में डॉक्टरों के लगभग 2 हजार पद खाली होने के बावजूद चिकित्सा विभाग को एकसाथ इतने पदों पर भर्ती की स्वीकृति नहीं मिल रही है। विभाग ने 1600 पदों पर एकसाथ भर्ती का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा था लेकिन मंजूरी नहीं मिली। पिछले दिनों विभाग ने चिकित्सा अधिकारियों के 1090 पदों पर भर्ती की थी। इसमें करीब 2600 डॉक्टर शामिल हुए थे। विभाग ने प्रतीक्षा सूची भी जारी की लेकिन सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देने के इच्छुक होने के बावजूद करीब 1600 अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिल पाया। इसके बाद से एमबीबीएस डिग्रीधारी अभ्यर्थी चिकित्सा मंत्री और अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
राज्य में डॉक्टरों की कमी की स्थिति यह है कि सैकड़ों अस्पताल एक-एक डॉक्टर के भरोसे हैं। वह अवकाश पर हो तो अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं होता। कई अस्पताल तो नर्सिंगकर्मियों के भरोसे रहते हैं। जबकि भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में से कई ग्रामीण इलाकों में सेवाएं देने को तैयार हैं।
विभाग का पूरी भर्ती के प्रयास का दावा
पिछले दिनों अभ्यर्थी चिकित्सा मंत्री से मिले तो अभ्यर्थियों ने बताया कि मंत्री ने उन्हें 1600 डॉक्टरों की शीघ्र भर्ती का आश्वासन दिया है। वित्त विभाग से स्वीकृति मिली तो एकसाथ इन पदों पर भर्ती हो सकती है। उधर, चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाल ही एक भर्ती पूरी हुई है, दूसरी भर्ती का प्रस्ताव शीघ्र भेजा जाएगा।
सरकार की कथनी-करनी में अंतर है। पद खाली हैं और अभ्यर्थी मौजूद हैं तो पद एकसाथ क्यों नहीं भरे जा रहे? सरकार को चिकित्सा अधिकारियों के सभी खाली पद भरने चाहिए। डॉ. अजय चौधरी, अध्यक्ष, सेवारत चिकित्सक संघ