GBS syndrome: एमडीएम अस्पताल में लगातार केस सामने आने के बाद अब एक रिसर्च भी की जाएगी। इसमें यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि बीमारी सिर्फ जोधपुर में है या पश्चिमी राजस्थान के अन्य क्षेत्रों से भी आ रही है।
पहले डायरिया फिर वायरल संक्रमण इतना बिगड़ता है कि नर्वस सिस्टम डैमेज हो जाता है। कई बार तो मरीज को लकवा मारने का खतरा बढ़ जाता है। यह लक्षण है जीबीएस सिंड्रोम के। पिछले तीन माह से इस सिंड्रोम के मरीज लगातार सामने आ रहे हैं। राजस्थान के जोधपुर में मेडिसिन व न्यूरोलॉजी दोनों ही विभागों में इसका उपचार चल रहा है। अकेले एमडीएम अस्पताल में एक पिछले तीन माह में 200 के करीब मरीज आ चुके हैं। इसके उपचार के लिए लगने वाला इंजेक्शन भी काफी महंगा है।
गुइलेन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली काफी प्रभावित हो जाती है। जोधपुर में यह पिछले तीन माह में ही देखने को मिली है। यह जीवाणु व वायरस से होती है। तीन माह पहले पुणे में इसके काफी ज्यादा मामले आए थे। इसके बाद यह बीमारी एकदम से चर्चा में आई। जोधपुर में भी जनवरी-फरवरी से इसके मरीज सामने आने लगे। सामान्य तौर पर सप्ताह में एक-दो मरीज पहले भी आते थे, लेकिन अब इसकी संख्या सप्ताह में 15 से 20 तक पहुंच गई है।
एमडीएम अस्पताल में लगातार केस सामने आने के बाद अब एक रिसर्च भी की जाएगी। इसमें यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि बीमारी सिर्फ जोधपुर में है या पश्चिमी राजस्थान के अन्य क्षेत्रों से भी आ रही है। इसके लिए अस्पताल के डाटा भी संग्रहित किए जाएंगे।
इसमें सामान्य बीमारी की तरह की शुरुआत होती है। डायरिया के बाद मरीज की स्थिति बिगड़ती है तो कई बार पता भी नहीं चलता कि जीबीएस सिंड्रोम का इफेक्ट है। कई बार उपचार में देरी के कारण लकवा मारने की स्थिति भी आ जाती है। इसके उपचार में लगने वाला इंजेक्शन भी 80 हजार से एक लाख रुपए तक की कीमत का है। फिलहाल यह सरकारी सप्लाई में नि:शुल्क मिल रहा है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण इसके सीमित स्टॉक का खतरा भी सामने आ सकता है।
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एक्सपर्ट व्यू
जीबीएस सिंड्रोम के मामले पिछले कुछ समय में बढ़े हैं। मेडिसिन की हर ओपीडी में एक-दो मामले आ रहे हैं। इसके कारण तो सटीकता से पता नहीं लगा सकते। मगर न्यूरो सिस्टम बुरी तरह से प्रभावित होता है।
डॉ. नवीन किशोरिया, एचओडी मेडिसिन विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर